
भीलवाड़ा शहर के कुवाड़ा एरिया में संचालित ट्रीटमेंट प्लांट (पत्रिका फोटो)
-सुरेश जैन
भीलवाड़ा: राजस्थान में भू-जल के गिरते स्तर के बीच टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा से पूरे राजस्थान के लिए एक प्रेरणादायक खबर है। औद्योगिक प्रक्रियाओं में प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भरता खत्म करने के लिए भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग ने ऐतिहासिक पहल की है।
यहां के टेक्सटाइल प्रोसेस हाउस अब टॉप-अप के लिए ग्राउंड वाटर (भू-जल) के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करने जा रहे हैं। इसकी जगह नगर निगम के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित (ट्रीटेड) पानी का उपयोग किया जाएगा। सीवरेज के पानी का टेक्सटाइल उद्योगों में उपयोग करने वाला भीलवाड़ा प्रदेश का पहला जिला बन जाएगा।
नगर निगम, भीलवाड़ा ने एसटीपी से शोधित पानी की बिक्री और उसे नाममात्र के शुल्क पर औद्योगिक प्रोसेस हाउस तक पाइपलाइन के जरिए पहुंचाने का काम डिजायर एनर्जी सॉल्यूशंस को सौंपा है। प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ रोड स्थित कपड़ा क्लस्टर की 21 टेक्सटाइल प्रोसेस इकाइयों को एसटीपी के पानी की आपूर्ति की जाएगी। इसके बाद आगामी चरणों में जिले के अन्य औद्योगिक क्लस्टरों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
इस पहल से प्रतिदिन लाखों लीटर भू-जल की बचत होगी। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन तंत्र (ईएसजी) के तहत नियमों का अनुपालन भी सुदृढ़ होगा।
सीवरेज के पानी के औद्योगिक उपयोग को लेकर जोधपुर प्रशासन ने भी पूर्व में टेंडर किए थे, लेकिन वहां किसी भी संवेदक ने इसमें हिस्सा नहीं लिया और यह प्रयोग सफल नहीं हो सका। ऐसे में भीलवाड़ा का यह मॉडल प्रदेश के अन्य औद्योगिक शहरों के लिए भी नजीर पेश करेगा।
30 एमएलडी: भीलवाड़ा शहर में प्रतिदिन सीवरेज के पानी को ट्रीट किया जा रहा है।
10 एमएलडी: प्लांट जिंदल सॉ की ओर से संचालित है।
10 एमएलडी: नगर निगम का प्लांट है, जो अभी निर्माणाधीन है।
10 एमएलडी: एक और प्लांट जिंदल सॉ की ओर से संचालित किया जा रहा है। कंपनी उद्योग के लिए 5 से 7 एमएलडी ट्रीटेड पानी उपयोग में ले रही है।
वर्तमान स्थिति: एसटीपी में सीवरेज के पानी को ट्रीट करने के बाद कोठारी नदी में छोड़ा जा रहा है।
Updated on:
01 Oct 2026 09:12 am
Published on:
01 Oct 2026 09:11 am
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