
मानसरोवर झील (पत्रिका फोटो)
Bhilwara Mansarovar Jheel Encroachment: भीलवाड़ा शहर के किशनावतों की खेड़ी स्थित मानसरोवर झील में धड़ल्ले से गिर रहे गंदे पानी और अवैध अतिक्रमण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने कड़ा रुख अपनाया। पब्लिक पावर एंड अवेयरनेस सोसाइटी, भीलवाड़ा की ओर से दायर याचिका पर हुई सुनवाई में एनजीटी ने स्पष्ट किया कि जलस्रोतों पर कब्जे और निर्माण संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हैं।
यदि नियमों की अवहेलना जारी रहती है, तो सीधे तौर पर अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। एनजीटी के इस आदेश के बाद नगर विकास न्यास की यहां बनाई गई 20 करोड़ रुपए की योजना भी खटाई में पड़ जाएगी। यहां बोटिंग की सुविधा, ओपन एयर थिएटर, सौंदर्यीकरण और निर्माण, जलकुंभी की समस्या का समाधान शामिल था।
ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मूल रूप से यह जलस्रोत 116 बीघा क्षेत्र में फैला था, लेकिन बाद में जलदाय विभाग को सौंपे जाते समय इसका वास्तविक क्षेत्रफल महज 28 हेक्टेयर रह गया।
याचिका में बताया गया कि झील में बिना ट्रीटमेंट के सीवरेज का पानी छोड़ने से जलकुंभी पनप रही है। इससे जलीय जीवन नष्ट हो रहा है और पूरा इलाका कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील होकर हवा को प्रदूषित कर रहा है।
अतिक्रमण व सीवरेज पर तत्काल रोक: न्यास, निगम आयुक्त और कलक्टर यह सुनिश्चित करेंगे कि झील क्षेत्र में किसी भी प्रकार का गैर-वेटलैंड उपयोग, अतिक्रमण, निर्माण, कचरा डालना या बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज छोड़ना तत्काल बंद हो।
राजस्थान राज्य वेटलैंड अथॉरिटी को दिए निर्देश: राजस्थान राज्य वेटलैंड अथॉरिटी को निर्देश दिए कि 15 दिनों के भीतर जिले के सभी वेटलैंड्स और तालाबों का फुल टैंक लेवल अंतिम रूप से तय किया जाए, ताकि भविष्य में भराव क्षमता को लेकर कोई विवाद न रहे।
झील में गंदा पानी छोड़ने के मामले में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पूर्व के उल्लंघनों सहित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माने) का आकलन कर वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य वेटलैंड अथॉरिटी को मूल भूमि रिकॉर्ड के अनुसार मानसरोवर झील की सटीक पैमाइश कर इसे वेटलैंड अधिसूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ट्रिब्यूनल ने चेतावनी दी कि यदि केंद्रीय या राज्य कानूनों के पालन में विफलता मिलती है, तो यह मान लिया जाएगा कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से हुए हैं। एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कलक्टर और नगर विकास न्यास को चार सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धारित की गई है।
Updated on:
27 Sept 2026 12:36 pm
Published on:
27 Sept 2026 12:36 pm
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