भीलवाड़ा

बीमारों को दर्द, अस्पताल को अनदेखी ने जकड़ा

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Mismanagement in hospital
Mismanagement in hospital

भीलवाड़ा। दिन में चिलचिलाती धूप और रात में हल्की सर्दी का अहसास। मौसम में आ रहे पल-पल बदलाव मौसमी बीमारियों को भी न्योता दे रहा है। आलम यह है कि महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) के आउटडोर में रोगियों की संख्या में वृद्धि हो गई है। चिकित्सक के हर कमरे के बाहर मरीजों की लम्बी कतार देखी जा सकती हैं। डेंगू और मलेरिया के साथ सर्दी-जुकाम के मरीज पहुंच रहे हैं।

अमूमन महात्मा गांधी अस्पताल के आउटडोर में चार सौ से पांच सौ मरीज रोजाना पहुंचते हैं। यह संख्या बढ़कर करीब आठ सौ हो गई है। इससे व्यवस्था गड़बड़ा गई है। सुबह नौ से अपराह्न तीन बजे तक आउटडोर में चिकित्सक के कमरे के बाहर लम्बी कतार लगी रहती है।

चिकित्सक को दिखाने से पहले पर्ची बनाने के लिए भी लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। उधर, पर्याप्त चिकित्सक नहीं होने से हर चिकित्सकों पर भी काम का बोझ बढ़ गया है। भीलवाड़ा के ही कोटा रोड स्थित सुवाणा में सामुदायिक चिकित्सालय के चारों ओर तालाब है। वहां मच्छर पनप रहे है। डेंगू और मौसमी बीमारियों को आमंत्रण दिया जा रहा है।

चिकित्सकों की सलाह

मौसम में बदलाव के कारण सर्दी-जुकाम के रोगियों की संख्या ज्यादा है। मौसम में बदलाव का बच्चों पर खासा असर पड़ा है। नवजात शिशु सर्दी-जुकाम की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। मलेरिया और डेंगू से बचाव के लिए लोग घरों के आस-पास गंदे पानी को जमा नहीं होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से खाली करें। पानी में एंटी लार्वा डालें। मच्छरों को नहीं पनपने नहीं दिया। रात में चादर ओढ़कर सोएं। बच्चों को पूरी बांह की शर्ट और पेंट पहनाएं। सर्दी-जुकाम होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। शाम को दरवाजा बंद रखें, ताकि मच्छर घर में प्रवेश नहीं कर पाए।

Updated on:
19 Oct 2018 02:49 am
Published on:
19 Oct 2018 02:49 am