
हनुमान बेनीवाल, सीएम भजनलाल व पूर्व सीएम अशोक गहलोत। फोटो: पत्रिका
भीलवाड़ा। कोटा-बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए है। प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर राजस्थान में सियासत तेज हो गई है। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 6 दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। वहीं, बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भी शुक्रवार दो प्रसूताओं की मौत हो गई। सरकारी अस्पतालो में लगातार हो रही प्रसूताओं की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या राजस्थान को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। गहलोत ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। वहीं, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान की बदहाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार माताओं की जान ले रही है।
भीलवाड़ा के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा के अस्पताल में 5 जुलाई को शिमला गुर्जर की मौत हुई थी। इसके बाद 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को ईशा पांडे, 9 जुलाई को दिव्या और 10 जुलाई को संगीता जीनगर की जान चली गई थी। इन सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू भेजा गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया था। हैरान कर देने वाली बात ये है कि ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। एमजीएच अधीक्षक भीलवाड़ा डॉ. अरुण गोड़ ने मौतों का कारण गंभीर प्रसूति जटिलताओं को बताया है। साथ ही डॉक्टरों की लापरवाही से मौत होने के आरोपों से इनकार किया है।
मामला सामने आने के बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा कि भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में मात्र 6 दिनों में 5 प्रसूताओं की मृत्यु और बांसवाड़ा में भी हुई मौतें हृदयविदारक एवं बेहद चिंताजनक हैं। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ऑपरेशन थिएटर (OT) में संक्रमण (Infection) की रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बावजूद लगातार सीजेरियन करते रहना और 30-40 ऑपरेशनों के बीच महज 5 सर्जिकल सेट होना सीधे तौर पर घोर लापरवाही और बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाता है। कोटा और बीकानेर, जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा की यह स्थिति विचलित करने वाली है।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या राजस्थान को भाजपा सरकार ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है? एक के बाद एक ऐसी घटनाएं जैसे सामने आ रही हैं वह दिखाता है कि सरकार का इस सबसे कोई मतलब नहीं है। राजस्थान के अलग-अलग अस्पतालों में बनी ऐसी स्थिति के सही मूल्यांकन एवं निदान के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को एक्सपर्ट की टीम भेजकर जांच करवानी चाहिए, जिससे प्रसूताओं की जान बचाई जा सके।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी प्रसूताओं की मौत मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। हनुमान बेनीवाल ने एक्स पर लिखा कि राजस्थान की बदहाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार माताओं की जान ले रही है। पहले कोटा, फिर बीकानेर और अब भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में 6 दिनों में 5 प्रसूताओं की मौत की खबर बेहद भयावह और शर्मनाक है। यदि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका थी, उपकरणों की कमी थी और फिर भी लगातार सीजेरियन किए जाते रहे, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की घोर विफलता है। आखिर इन माताओं की मौत का जिम्मेदार कौन है? आखिर कब तक सरकारी अस्पतालों में माताओं की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा? क्या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ बयान देने तक सीमित रह गई है? राजस्थान के गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की नाकामी के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था आईसीयू में है और सरकार संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पर खड़ी है। माताओं की मौत पर जवाबदेही तय होना ही चाहिए।
बता दें कि मई महीने में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी, जबकि जून में बीकानेर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया था, जिनमें से दो महिलाओं की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। अब भीलवाड़ा में छह दिन के भीतर पांच प्रसूताओं और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में एक ही दिन में दो प्रसूताओं की मौत ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है।
Updated on:
11 Jul 2026 10:44 am
Published on:
11 Jul 2026 10:27 am
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