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Nagaur: दुल्हन तो आई, लेकिन दूल्हा नहीं लौट सका… फेरे शुरू होते ही सीने में उठा दर्द, 18 दिन बाद अस्पताल में तोड़ा दम

रोहट क्षेत्र के सुकरलाई गांव से एक बारात हंसी खुशी मांडावास पहुंची, लेकिन बारातियों व परिजनों ने शायद यह नहीं सोचा होगा की अपने घर पर दुल्हन को लेकर आ जाएंगे, लेकिन दूल्हा नहीं आ पाएगा।
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दूल्हा ओमप्रकाश मेघवाल व दुल्हन कविता। फोटो: पत्रिका

नागौर। रोहट क्षेत्र के सुकरलाई गांव से एक बारात हंसी खुशी मांडावास पहुंची, लेकिन बारातियों व परिजनों ने शायद यह नहीं सोचा होगा की अपने घर पर दुल्हन को लेकर आ जाएंगे, लेकिन दूल्हा नहीं आ पाएगा। सुकरलाई गांव से ओमप्रकाश मेघवाल (28) की बारात 20 जून को मांडावास पहुंची। जहां ओमप्रकाश का विवाह कविता के साथ हो रहा था। सुबह सवा दस बजे के फेरे थे। सभी हंसी खुशी फेरे में बैठे थे। जैसे ही फेरे शुरू हुए ओमप्रकाश के सीने में दर्द होने लगा। परिजनों ने सोचा गर्मी के कारण हो रहा होगा।

परिजनों ने आनन-फानन में फेरे करवाए। उसके बाद ओमप्रकाश को चारपाई पर लिटा दिया। उसकी तबीयत अधिक बिगड़ने लगी और अचेत हो गया। अचानक तबीयत खराब होने के बाद परिजनों ने बारात को जल्दी से रवाना कर दुल्हन कविता को सुकरलाई गांव भेजा।

वहीं ओमप्रकाश को गंभीर हालत में लेकर बांगड अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती करवाया। जहां हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने ओमप्रकाश को वेंटीलेटर पर रखा। देर रात बांगड अस्पताल से एमडीएम जोधपुर रैफर किया गया। चिकित्सकों ने भर्ती कर उपचार शुरू किया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। 8 जुलाई की रात 12 बजे चिकित्सकों ने ओमप्रकाश को मृत घोषित कर दिया।

ओमप्रकाश के चचेरे भाई वजाराम ने बताया कि शादी से दो दिन पहले ओमप्रकाश को खांसी व बुखार आया था। इस पर पाली बांगड अस्पताल में उपचार करवाकर जांचे करवाई थीं। सभी जांचें नेगेटिव ही आई थीं। कोई बीमारी नहीं थी। जोधपुर में चिकित्सकों ने एमआरआई, सीटी स्कैन भी करवाई, लेकिन कोई बीमारी पकड़ में नहीं आई। 9 जुलाई को परिजन ओमप्रकाश का शव लेकर सुकरलाई गांव पहुंचे व अंतिम संस्कार किया गया।

पिता की मौत के बाद जयपुर चला गया

ओमप्रकाश के पिता देवाराम की मौत करीब 14 वर्ष पहले हो गई थी। ओमप्रकाश अपनी पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए जयपुर चला गया। जयपुर में एक होटल में वेटर का कार्य करता था। पिता की मौत के बाद अपनी मां काली देवी व इकलौती बहन राधा का सहारा था।

खुशी से पहले ही मातम छा गया

सुकरलाई निवासी ओमप्रकाश मेघवाल की शादी को लेकर घर परिवार सभी खुश थे। ओमप्रकाश जयपुर से 7 जून को घर पर आया था। उसके 11 जून को सगाई मांडावास निवासी कविता के साथ तय हुई थी। उसी दिन लग्न भी लिखे गए। उसके बाद विवाह तय करके 20 जून को बारात लेकर मांडावास पहुंचे। ओमप्रकाश की मौत से परिवार में मातम छा गया। मां व एकलौती बहन का रो-रो कर बुरा हाल हो गया।