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फाइलों में अटके करोड़ों के प्रोजेक्ट, लम्बी टेंडर प्रक्रिया से नागौर के विकास पर ब्रेक

जिले में सड़कों व पुलों के कई प्रोजेक्ट एक साल पहले स्वीकृत, काम शुरू नहीं होने से लोग परेशान, सड़कों में पड़े गड्ढ़े, पुलों का काम भी अधूरा, फिर भी जिम्मेदार चुप, अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों की उदासीनता
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बीकानेर रोड

बीकानेर रोड

नागौर. प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राजनेताओं के उदासीन रवैये के कारण नागौर जिले का विकास थम-सा गया है। राज्य एवं केन्द्र सरकार के कई प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए एक साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन अब तक उनकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई। खासकर सड़कों एवं पुलों से जुड़े प्रोजेक्ट्स अधूरे होने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और टूटी सड़कें हादसों का कारण बन रही हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी गंभीर नहीं है। इससे लगता है नागौर का कोई ‘धणी-धोरी’ नहीं है।

जिले के मुख्य प्रोजेक्ट

1- जोधपुर रोड फोरलेन :

नागौर से नेतड़ा तक बनने वाले करीब 87 किलोमीटर के फोरलेन की स्वीकृति मार्च 2025 में मिली। इसके बाद गोगेलाव से अमरपुरा तक बनने वाले बायपास को शामिल करते हुए हेम प्रोजेक्ट के तहत 1393.34 करोड़ रुपए की स्वीकृति जून 2025 में जारी की गई। एनएच के अधिकारियों ने बावड़ी में बनने वाले बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण करने सहित टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में एक साल से अधिक समय लगा दिया, लेकिन अभी तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो पाए हैं। यदि इसी गति से प्रक्रिया चलती रही तो अगले छह महीने में काम शुरू होना मुश्किल है। वाहन चालक दो जगह टोल चुकाने के बावजूद खराब सड़क पर सफर कर रहे हैं।

2- बीकानेर रोड पर 6.2 किमी का फोरलेन :

शहर के कृषि मंडी से गोगेलाव तक बनने वाले 6.2 किमी के फोरलेन का काम पिछले पांच साल में भी पूरा नहीं हो पाया है। पूर्व में ठेकेदार की ओर से काम सही नहीं करने पर एनएच ने उसका अनुबंध निरस्त कर नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर मोर्थ(सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार) को भेजा, जिस पर मोर्थ ने 30.94 करोड़ रुपए का बजट पिछले साल स्वीकृत कर दिया था। छह महीने से अधिक का समय बीतने के बावजूद अब तक संवेदक को वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो पाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फाइल अप्रूवल के लिए दिल्ली गई हुई है।

3. मानासर से कलक्ट्रेट तक सड़क जर्जर :

शहर के मानासर से कलक्ट्रेट तक की सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता बस्तीराम डिडेल का कहना है कि यह सड़क अब नगर परिषद के अधीन है। गत वर्ष शहर सहित जिले में हुई अतिवृष्टि के बाद करोड़ों का बजट सरकार से दिया गया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस सड़क का नवीनीकरण कराना तो दूर, ‘कारियां’ तक नहीं लगवाई। जबकि यह शहर की मुख्य सड़क है और पहले हर तीन साल में नवीनीकरण होता था। सर्किट हाउस से श्रीराम चौराहा तक इस सड़क की हालत खस्ताहाल है, जहां से कलक्टर सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि रोजाना निकलते हैं, लेकिन उन्हें गड्ढ़े नजर नहीं आ रहे।

4. एफओबी का काम धीमा :

सांसद हनुमान बेनीवाल के प्रयासों से नागौर को मिले दो फुट ओवरब्रिज (एफओबी) में से एक का काम बहुत धीमा है तो दूसरा अभी शुरू नहीं हुआ है। जेएलएन अस्पताल के सामने पिछले छह महीने से एफओबी का काम धीमी गति से रुक-रुक कर चल रहा है, वहीं मिर्धा कॉलेज के सामने अभी शुरू ही नहीं हुआ है, जबकि दोनों कामों का ठेकेदार एक ही है। गौरतलब है कि दोनों एफओबी की स्वीकृति मई 2025 में जारी हो गई थी।

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प्रयास कर रहे हैं

नागौर से जोधपुर के नेतड़ा तक बनने वाले फोरलेन सड़क के लिए वन विभाग की अनुमति दिल्ली से आनी है। इसके बाद ठेकेदार को बैंक गारंटी देने के लिए समय दिया जाएगा। गोगेलाव तक बनने वाले 6.2 किमी के फोरलेन के लिए टेंडर खोल दिए हैं, अप्रूवल के लिए फाइल दिल्ली भेजी है। जहां तक बीकानेर रेलवे फाटक पर आरयूबी का काम है तो उसके लिए ठेकेदार डिजायन व ड्राइंग तैयार कर रहा है। हमें मिलने के बाद रेलवे से अप्रूवल लेकर काम शुरू करवाएंगे।

- दीपक परिहार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी एनएच खंड, नागौर