भीलवाड़ा

राजस्थान के इस शहर में होता है ऐसा नृत्य जो बताता है वीरों की शक्ति और बुद्धिमता

यह स्वांग शेरो का था जिससे यहां के वीरों की शक्ति और बुद्धिमता का परिचय मिल सके।
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Nahar dance in bhilwara
Nahar dance in bhilwara

माण्डल।

प्राकृतिक सौंदर्य, पुरातत्व वैभव एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण पूरे देश में मांडल कस्बे की एक खास पहचान है। यहां के लोक कलाकारों ने देश के कोने में जाकर धाक जमाई है। विरासत की देन ४०६वां नाहर नृत्य रंग तेरस को तीन अप्रेल को कस्बे में दो जगह शेष सहाय धाम व दशहरा चौक में होगा। इसकी तैयारियां जोरों शोरों से चल रही है।

मनोरंजन के लिए किया नाहर नृत्य बना गया यादगार
1614 ईस्वी में मुगल बादशाह जहांगीर शहजादा खुर्रम सम्राट शाहजहां महाराणा अमर सिंह से संधि करने मेवाड़ आए तो यहां तालाब किनारे महल बनाकर कुछ अर्से तक अपनी बेगमों के साथ पड़ाव डाला। शहजादे खुर्रम के लोकानुरंजन के लिए यहा के श्रेष्ठ कलाकारों ने ऐसा स्वांग प्रस्तुत किया। जो भरपूर मनोरजंन ही नहीं दे पाया अपितु यादगार बन गया। यह स्वांग शेरो का था जिससे यहां के वीरों की शक्ति और बुद्धिमता का परिचय मिल सके। इस नृत्य को देखकर बादशाह बहुत खुश हुए व इसको जारी रखने के लिए पाराशर वंशजो का शाही ताम्र पत्र भेंट किया। तब से नाहर नृत्य वार्षिक उत्सव के रूप मे प्रति वर्ष मनाया जाने लगा।

नाहर का रूप करते है धारण
नृत्य में अलग-अलग समाज के चार पुरुषों को अपने शरीर पर दूधिया रूई चिपका कर शेर का रूप धारण कर सिर पर दो सींग भी लगाए जाते हैं। इनके साथ ही लाल लंगोट तथा सिर पर टोपा पहने एक भोपा होता है। मोरपंख की छुवन से यह सबको सावचेत करता है। कर्ण प्रिय वाद्य यंत्र जंगी, ढोल नगाड़ों के डंकों की तेज ध्वनि व बांक्या ढोलक की मधुर झंकार पर धीरे-धीरे नाचते आगे बढते जाते हंै। लगभग एक घंटे तक शेरो की दहाड़ते एक दूसरे पर वार करते अजीबोगरीब प्रस्तुति देते हैं। जो दर्शकों की निगाहे थाम देते हैं। बीच बीच मे धडूम की आवाज कर मनोरंजन बढाते हैं।

खेलते होली निकलती खाटली
रंग तेरस को कस्बेवासी वार्षिक उत्सव के रूप में मनाने लगे हैं। चिर परिचितों व रिश्तेदारों को न्योता देकर बुलाते हैं। सुबह रंग गुलाल लगाकर खुशी का इजहार करते हैं। दोपहर मे बडी धूमधाम तालाब की पाल व सदर बाजार से खाटली पर बैठाकर बादशाह बेगम की सवारी को युवा अपने अलग ही अंदाज में निकल पड़ते हैं। रास्ते में महिलाएं बाल्टियों में पानी भर कर उनको रंग खिलाती हैं। दोनों ही टोलियां तहसील कार्यालय के पास जाकर वह बादशाह बने महामूर्ख अपना किरदार प्रशासनिक अधिकारियों को दिखा उनसे नजराना वसूलते है। अधिकारी भी उनको रंग गुलाल लगा कर उनका स्वागत करते हंै।

Published on:
28 Mar 2019 09:12 pm