भीलवाड़ा जिले के ग्रामीण इलाकों में मंगलवार को मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया। जिले में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में लहलहाती सरसों की फसल को पूरी तरह बिछा दिया है। ओलों की मार इतनी भीषण थी कि कई जगह […]
भीलवाड़ा जिले के ग्रामीण इलाकों में मंगलवार को मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया। जिले में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में लहलहाती सरसों की फसल को पूरी तरह बिछा दिया है। ओलों की मार इतनी भीषण थी कि कई जगह खेतों में सफेद चादर बिछ गई। इससे सरसों की फलियां टूटकर बिखर गईं। हालांकि यह नुकसान कुछ क्षेत्रों में ही हुआ है। जिले में 3 लाख 61 हजार 202 हेक्टेयर में बोई गई फसलों में से 10 हजार 234 हेक्टेयर में खराबा दर्ज किया गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति सरसों की फसल की है, जहां सर्वाधिक नुकसान का आकलन किया गया है।
मंगलवार को अचानक आए मौसम में बदलाव के कारण जिले के विभिन्न उपखंडों में चने के आकार के ओले गिरे। सबसे ज्यादा नुकसान सरसों की अगेती और पछेती दोनों फसलों को पहुंचा है। किसानों का कहना है कि फसल पकने को तैयार थी, लेकिन कुदरत के इस कहर ने निवाला छीन लिया। सरसों के साथ-साथ चना और गेहूं की फसलों में भी नुकसान हुआ है।
जिले में 61 हजार 367 हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की गई थी। इसमें से कुल 5,005 हेक्टेयर फसल प्रभावित मानी गई है। चिंता की बात यह है कि जिले में 50 से 75 प्रतिशत खराबे वाली श्रेणी में कुल 1080 हेक्टेयर फसल है, जिसमें से अकेले 1050 हेक्टेयर केवल सरसों है। यानी नुकसान की मार सबसे सरसों उत्पादक किसानों पर पड़ी है।
जिले की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई सर्वाधिक 1 लाख 55 हजार 596 हेक्टेयर में हुई थी। इसमें 1,850 हेक्टेयर में खराबा माना गया है, जो कि बुवाई के रकबे के अनुपात में कम है। वहीं, चने की 84 हजार 49 हेक्टेयर फसल में से 2 हजार 756 हेक्टेयर में नुकसान दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार 75 से 100 प्रतिशत खराबा पूर्ण क्षति की श्रेणी में जिले में कुल 25 हेक्टेयर क्षेत्र दर्ज किया गया है, और यह पूरा नुकसान अन्य फसलों की श्रेणी में आता है। खेतों में हुए इस नुकसान के बाद अब किसानों की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं। किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द विशेष गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिलाया जाए।
अचनाक बदले मौसम के कारण रबी में बोई गई फसलों का प्रारंभिक आकलन कर लिया गया है। जिले में करीब 10 हजार 234 हेक्टेयर में खराबा हुआ है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वीके जैन, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग भीलवाड़ा
फैक्ट फाइल: एक नजर आंकड़ों पर
फसल-वार नुकसान का गणित