यह उदाहरण बानगीभर है। आबकारी विभाग की मौन स्वीकृति कहे या लापरवाही
भीलवाड़ा।
यह उदाहरण बानगीभर है। आबकारी विभाग की मौन स्वीकृति कहे या लापरवाही। शराब ठेकेदारों को लूट की खुली छूट मिली हुई। यही वजह है कि शहर में हर दुकान पर आपको अलग-अलग कीमत मिलेगी। जबकि शराब ब्रांड एक सा होगा। सुनने में अटपटा लग रहा। लेकिन हकीकत है। राजस्थान पत्रिका ने शनिवार को शहर में विभिन्न शराब की दुकानों का जायजा लिया तो स्थिति चौकाने वाली थी।
बोतल पर प्रिंट रेट से कई ज्यादा दाम वसूल कर चांदी कूटी जा रही है। इन सबके बावजूद जिम्मेदार आबकारी विभाग कार्रवाई की बजाए चादर तानकर सो रहा। पत्रिका टीम ने करीब आधा दर्जन दुकानों पर स्थिति देखी। सब पर इस तरह की स्थिति मिली। हर दुकान पर शराब की बोतल पर 50 से 100 रुपए तक ज्यादा लिए जा रहे थे। बीयर पर भी 23 से 30 रुपए प्रति बोतल ज्यादा ले रहे थे। जबकि सरकार ने ठेकेदार कमीशन निर्धारित कर रखा है। फिर भी ओवररेट लेकर ग्राहको को चूना लगाया जा रहा है।
आपत्ति जताने पर बदसलूकी, नहीं तो चलता किया
शराब खरीदने पर अगर कोई प्रिंट रेट और सेल्समेन द्वारा मांगी गई कीमत में आ रहे फर्क पर आपत्ति जताता है तो उसके साथ बदसलूकी शुरू कर दी जाती है। ग्राहक को कहा जाता है कि रेट तो यहीं लगेगी। लेनी है तो लेवे नहीं तो चलते बने। खुलेआम ज्यादा वसूली के बावजूद सेल्समेन को कोई डर नहीं। आखिरकार ग्राहक को मनमाफिक दाम देने को मजबूर होना पड़ता है।
जुर्माने के साथ लाइसेंस रद्द
नियम के अनुसार शराब की बोतल पर रेट लिखी होती है। उस प्रिंट रेट से ज्यादा वसूली नहीं की जा सकती। एेसा करने पर आबकारी को शिकायत करके सेल्समेन को पकड़ाया जा सकता है। उस पर जुर्माना लगेगा। लेकिन लगातार शिकायत मिलती है तो दुकान का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।
उठाव की चिंता, वसूली का ध्यान नहीं
आबकारी विभाग को महज ठेकेदार द्वारा हर माह शराब के उठाव का ध्यान रहता है। लक्ष्य के अनरूप शराब का गोदाम से उठाव होता रहे और सरकार को राजस्व मिलती रहे। ठेकेदार पर इसी का दबाव बनाया जाता है। कितनी रेट ले रहा उससे सरोकार नहीं। जबकि विभाग के पास इन सबकी निगरानी के लिए मताहतों की फौज है। लेकिन कभी जाकर जांच ही नहीं करते। इससे ठेकेदार और सेल्समेन के हौसले बुलंद हो रहे है। ग्राहक की दुकान पर सुनते ही नहीं।
बीलिया
संवाददाता बीलिया स्थित शराब की दुकान पर गया। वहां अंग्रेजी शराब का पव्वा मांगा। उस पर 124 रुपए प्रिंट लिखा था। सेल्समेन ने 130 रुपए मांगे। आपत्ति जताने पर भी नहीं माना।
पीएनटी चौराहा
पुर रोड स्थित पीएनटी चौराहे पर शराब की दुकान पर उसी पव्वे के 140 रुपए मांगे। संवाददाता ने आपत्ति जताई ने सेल्समेन बदसलूकी पर उतारू हो गया। उसे दोहराया कि प्रिंट रेट से ज्यादा नहीं लिया जा सकता। सेल्समेन ने वहां से रवाना हो जाने की बात कहीं।
बड़ला चौराहा
बड़ला चौराहे पर अंग्रेजी शराब का पव्वा मांगा। उस पर प्रिंट रेट 189 रुपए थी। सेल्समेन ने 190 रुपए मांगे। यहीं भी ओवररेट की बात कहीं तो उसने पव्वे लेकर वापस रख लिया।