
भीलवाड़ा. शहर में स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण हो या अतिक्रमण की शिकायत, इसे रोकने की जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। इसके लिए अतिक्रमण शाखा में भारी लवाजमा है। इसमें १५ होमगार्ड भी हैं, जिन्हें हर महीने तीन लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया जाता है। इन होमगार्ड की मदद से एक साल में कितने अवैध निर्माण रोके गए, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। आयुक्त नारायणलाल मीणा ने परिषद में प्रत्येक बुधवार को शुरू की गई समीक्षा बैठक में अतिक्रमण शाखा के प्रभारी सोहेल शेख से पूछा था कि एक साल में कितनी कार्रवाई की गई। यह जानकारी अब तक आयुक्त को नहीं मिली है। अतिक्रमण शाखा से जवाब लिखा गया है कि होमगार्ड १५ साल से कार्यरत हैं। इस पर आयुक्त ने पिछले १५ साल में की गई कार्रवाई के बारे में पूछ लिया। इस पर शाखा में खलबली मची हुई है। अब बुधवार को होने वाली बैठक में इसकी समीक्षा की जाएगी।आयुक्त ने नहीं बुलाए होमगार्डअतिक्रमण शाखा में फैली अव्यवस्थाओं से नाराज आयुक्त ने एक नवंबर के बाद से होमगार्ड नहीं रखने के निर्देश दिए हैं। उनका तर्क है कि फिलहाल कोई काम नहीं है, तो राशि खर्च क्यों की जा रही है। इधर, कुछ कर्मचारियों का कहना है कि होमगार्ड कायन हाउस मेंं गायों को छोडऩे भी जाते थे। उनके हर काम का कोई रिकॉर्ड नहीं रहता है।
संबंधित कर्मचारी को बदला
आयुक्त ने अतिक्रमण शाखा में कार्यरत लिपिक श्रवण साहू को संस्थापन शाखा में लगा दिया है। साहू के स्थान पर अभी किसी को नहीं लगाया गया है। आयुक्त ने कहा, जब इतने सालों से काम कर रहे हैं तो पूरे शहर में बारे में पता होना चाहिए।
धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण
शहर में कई जगह अवैध निर्माण हो रहे हैं। नक्शे पास नहीं होने पर भी निर्माण करने की शिकायत पर लोगों को नोटिस दिया जाता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती है। कई जगह अवैध कॉम्पलेक्स बन रहे हैं। इससे परिषद को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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१५ होमगार्ड अतिक्रमण शाखा में लगे थे। प्रभारी से पूछा है कि इन पर साल में ४० लाख खर्च करने के बाद परिषद ने कितने अवैध निर्माण रोके और क्या कार्रवाई की। इसकी जानकारी अब तक नहीं आई है। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नारायणलाल मीणा, आयुक्त, नगर परिषद