देश की नई टेक्सटाइल विस्तार एवं रोजगार योजना का पूरा लाभ भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को दिलाने के लिए मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने कमर कस ली है। गुरुवार को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में वस्त्र मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चैम्बर ने जोरदार पैरवी करते हुए मांग रखी कि योजना […]
देश की नई टेक्सटाइल विस्तार एवं रोजगार योजना का पूरा लाभ भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को दिलाने के लिए मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने कमर कस ली है। गुरुवार को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में वस्त्र मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चैम्बर ने जोरदार पैरवी करते हुए मांग रखी कि योजना के दायरे में पूर्व से संचालित पुराने उद्योगों को भी शामिल किया जाए और उन्हें नई मशीनें खरीदने पर सब्सिडी तथा विशेष ऋण सुविधा दी जाए।
चैम्बर अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने बताया कि मंत्रालय ने इस नई योजना के तहत लघु एवं सूक्ष्म इकाइयों को राहत देने का बड़ा खाका खींचा है। इसमें 10 करोड़ रुपए तक के बिना गारंटी ऋण और एमएसएमई इकाइयों को 100 करोड़ रुपए तक के कैपेक्स लोन का प्रावधान रखा गया है। इन पर ब्याज अनुदान भी देय होगा। इसके अलावा 100 करोड़ रुपए से अधिक के बड़े निवेश के लिए कम ब्याज दर पर विदेशी फंडिंग सहायता लेने की योजना भी शामिल की गई है।
इस योजना में प्रोसेस हाउस मशीनों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देते हुए कैपिटल सब्सिडी का विशेष प्रावधान किया है। अपैरल और मेड-अप्स सेक्टर्स में नए रोजगार सृजन पर सरकार विशेष प्रोत्साहन देगी। नई शटल-लेस मशीनों पर 20 से 25 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी मिलेगी। डिजाइनिंग और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन को भी मशीनरी माना जाएगा। पानी की खपत 40 प्रतिशत तक घटाने वाली या सौर ऊर्जा आधारित मशीनों पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी (ग्रीन इंसेंटिव) का प्रस्ताव है। इससे यूरोपीय देशों के कार्बन टैक्स के प्रभाव से निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।
चैम्बर के महासचिव आरके जैन ने बताया कि इस बैठक में हिस्सा लेने गए अध्यक्ष मिश्रा ने भीलवाड़ा के निर्यातकों की तकनीकी परेशानियों को प्रमुखता से उठाया। चैम्बर ने मांग की कि टेक्सटाइल कमेटी की टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर योजना के तहत भीलवाड़ा में भी एक विशेष केंद्र स्थापित किया जाए। इससे स्थानीय स्तर पर ही निर्यातकों को प्रमाणन, परीक्षण और तकनीकी परामर्श जैसी अहम सुविधाएं मिल सकेंगी और उन्हें अन्य शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बैठक की अध्यक्षता वस्त्र सचिव नीलम शॉमी राव ने की। अतिरिक्त वस्त्र सचिव रोहित कंसल और वस्त्र आयुक्त वरुन्दा मनोहर देसाई सहित विभिन्न राज्यों के औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए।
लघु उद्योग भारती के चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष महेश हुरकुट ने बताया कि इस योजना में ब्याज दर पर अनुदान, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए पृथक प्रावधान, अनुदान राशि का निर्धारित समय सीमा में सीधे उद्यमियों के खातों में अंतरण, भारत निर्मित मशीनरी पर 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त सहायता, विद्युत दरों में रियायत, सौर ऊर्जा संयंत्र एवं सौर उपकरणों पर अनुदान, क्लस्टर या औद्योगिक पार्क में सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए भूमि आरक्षण एवं तैयार उपयोग सुविधा, परिवहन अनुदान तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय एवं गुणवत्ता प्रमाणन में विशेष रियायत प्रदान करने जैसे सुझाव दिए।