भीलवाड़ा

‘दुनिया की सबसे खराब है हमारी शिक्षा नीति’: मुनि आदित्य सागर

तनाव और तकनीक की गिरफ्त में बचपन

2 min read
Jan 19, 2026
'Our education policy is the worst in the world': Muni Aditya Sagar

जयपुर में हाल ही एक मासूम छात्रा द्वारा तनाव के चलते की गई आत्महत्या ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने आधुनिक जीवनशैली और शिक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जैन मुनि आदित्य सागर ने कहा कि आज की शिक्षा संस्कारों से कट चुकी है। उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को 'दुनिया की सबसे खराब व्यवस्था' बताते हुए कहा कि यह केवल डिग्रियां बांट रही है, जीवन जीना नहीं सिखा रही। मुनि ने चेतावनी दी कि अगर हम आधुनिकता की अंधी दौड़ से बाहर निकलकर आध्यात्मिकता की ओर नहीं मुड़े तो आने वाली '6जी' जैसी तकनीकें महामारी से भी घातक सिद्ध होंगी।

सवाल: छोटी-छोटी बातों पर बच्चों में तनाव बढ़ रहा है, आत्महत्या जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मूल कारण क्या है।

मुनि आदित्य सागर: तनाव इसलिए बढ़ा है क्योंकि आज के बच्चे, अभिभावक और स्कूल 'मेडिटेशन' (ध्यान) के पीरियड को छोड़ चुके हैं। हम बच्चों को साक्षर बना रहे हैं, लेकिन संस्कारित नहीं।

सवाल: आपने भारतीय शिक्षा नीति को दुनिया की सबसे खराब नीति कहा है, ऐसा क्यों?

मुनि आदित्य सागर: शिक्षा नीति के नाम पर देश को ठगा गया है। पहले तीसरी-चौथी पास व्यक्ति भी करोड़पति होता था, क्योंकि उसके पास व्यवहारिक ज्ञान था। सेठ हुकुमचंद जैसे लोग तीसरी-चौथी पास होकर भी बाजार चलाते थे। आज 12वीं की डिग्री को साक्षरता का पैमाना बना दिया गया है।

सवाल: आधुनिकता और तकनीक को लेकर क्या सौचते है?

मुनि आदित्य सागर: तकनीक ने हमें सुविधाओं के नाम पर कमजोर कर दिया है। पहले फोन घर के एक कोने में होता था, आज शरीर का हिस्सा है। 6जी आने पर रेडिएशन बढ़ेगा और मानवीय इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) घटेगी।

सवाल: ग्लोबल वार्मिंग दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है, जैन दर्शन इसे कैसे देखता है?

मुनि आदित्य सागर: जैन दर्शन ही पर्यावरण संरक्षण का असली मार्ग है। हम तो वही सब्जी खाते हैं जिससे पौधे को नुकसान न हो जैसे लौकी, भिंडी, अंगूर। जैन मुनि पैदल चलते हैं ताकि पेट्रोल नहीं जले और प्रकृति सुरक्षित रहे। आज पेड़ कट रहे हैं और एसी बढ़ रहे हैं।

सवाल: आज की युवा पीढ़ी भटक रही है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

मुनि आदित्य सागर: युवा नहीं, माता-पिता बिगड़ रहे हैं। 'लिबरल' होने के नाम पर बच्चों को खुद से दूर कर रहे हैं। संस्कार माता-पिता की संगत से मिलते हैं, स्कूल की डिग्री से नहीं। बच्चों को पढ़ाई के नाम पर बाहर (हॉस्टल) भेजना उनके संस्कारों की बलि चढ़ाना है।

Published on:
19 Jan 2026 09:22 am
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