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Sanwariya Seth: वैश्विक उथल-पुथल भी बेअसर, सांवलिया सेठ का भंडार 300 करोड़ पार; जानें रिकॉर्ड चढ़ावे के 3 बड़े कारण

Sanwariya Seth Mandir: दुनिया में कोरोना, बाजार में मंदी या ट्रंप टैरिफ जैसी कोई भी आर्थिक उथल पुथल हो, लेकिन मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया सेठ के भंडार पर इनका असर नजर नहीं आता।
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भीलवाड़ा

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Anil Prajapat

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सुरेश आमेटा

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Updated: 26 Jan 2026, 1:31 PM IST

Sawariya Seth (1)

सांवलिया सेठ। फोटो: पत्रिका

भीलवाड़ा। दुनिया में कोरोना, बाजार में मंदी या ट्रंप टैरिफ जैसी कोई भी आर्थिक उथल पुथल हो, लेकिन मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया सेठ के भंडार पर इनका असर नजर नहीं आता। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार मंदिर के भंडार में नकदी, सोना और चांदी मिलाकर कुल चढ़ावा 300 करोड़ रुपए से अधिक रहा है।

मंदिर से जुड़े जानकारों का कहना है कि यहां आने वाला चढ़ावा किसी बाजार स्थिति से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा होता है। यही कारण है कि हर वर्ष भंडार में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

रिकॉर्ड चढ़ावे के तीन बड़े कारण


1. टेंशन फ्री बिजनेसः व्यापारियों का मानना है कि जब भगवान पार्टनर हैं, तो नुकसान की चिंता उनकी है। यह भरोसा उन्हें मंदी में भी निडर होकर काम करने की ताकत देता है।
2. ईमानदारी का ऑडिटः यहां कोई सीए हिसाब नहीं देखता, बल्कि इंसान की अंतरात्मा हिसाब करती है। यदि कभी काम मंदा हो जाए, तो काम दोबारा शुरू होते ही पुराना बकाया ब्याज समेत चुकाया जाता है।
3. सात समंदर पार तक भरोसाः मंदिर के भंडार में निकलने वाले डॉलर, पाउंड और रियाल इस बात का सबूत हैं कि विदेशों में रह रहे श्रद्धालु भी इस आस्था से जुड़े हैं।

श्रद्धालु करते ठाकुरजी से 'पार्टनरशिप डीड'

देश के विभिन्न राज्यों से यहां आने वाले कई श्रद्धालु अपने व्यापार या आजीविकों को धार्मिक आस्था से जोड़ते हैं। कपड़ा, मार्बल, खेती-किसानी और कई व्यवसायी व उद्योगपति स्वेच्छा से ठाकुरजी के साथ 'पार्टनरशिप डीड' भी लिखते हैं। जिसमें वे अपनी आय का एक हिस्सा भगवान के नाम समर्पित करने की मन्नत मानते हैं। यह कोई कानूनी या व्यावसायिक अनुबंध नहीं, बल्कि पूरी तरह व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित होता है।

किसान और छोटे दुकानदार भी पार्टनर

श्रद्धा के अनुसार ठाकुरजी के साथ बिजनेस मॉडल में अपना योगदान करते हैं। किसान अच्छी फसल की मनोकामना करते हैं अगर सब कुछ अच्छा रहा तो कमाई का एक हिस्सा भंडार में अर्पित करेंगे। वहीं, कई छोटे-बड़े दुकानदार और वाहन मालिक अपनी पहली कमाई भगवान को समर्पित करते हैं। नुकसान या कठिन समय में भी श्रद्धालु निराश होने के बजाय 'सेठजी पर छोड़ देते हैं कि नुकसान आपका, आप ही संभालो।

नकदी के साथ भावनात्मक पत्र भी

हर महीने भंडार खुलने पर नकदी और आभूषणों के साथ कई श्रद्धालुओं की भावनात्मक चिट्ठियां भी मिलती हैं। इनमें वे अपनी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भगवान के प्रति आभार और विश्वास व्यक्त करते हैं। कई बार तो पत्रों में श्रद्धालु लिखते हैंः सेठजी, इस बार सेल कम थी इसलिए चढ़ावा कम है, अगली बार कसर निकाल दूंगा।

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