
भीलवाड़ा।
कोठारी नदी में प्रदूषण मामले को लेकर बनाई गई पांच सरकारी एजेंसियों की कमेटी ने भी जिला कलक्टर को 'गोलमालÓ पेश की है। कलक्टर ने रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) को ई-मेल के माध्यम से पेश की है। रिपोर्ट में खास बात यह है कि एक विभाग ने अपना स्थान बदलते हुए नदी में हो रहे प्रदूषण से किसी प्रकार का सरोकार होने से इनकार करते हुए नगर परिषद को जिम्मेदार माना है। पांच एजेंसियों नगर विकास न्यास, नगर परिषद, तहसीलदार, जल संसाधन व राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने कोठारी नदी स्थित एक स्थान पर विशेष ध्यान दिया है। इसके अलावा जिला कलक्टर ने जलदाय विभाग को भी अलग से रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
एजेंसियों ने यह बताया रिपोर्ट में
१. नगर विकास न्यास
न्यास की आरसी व्यास योजना में सेक्टर-१० में भूखंड-२१ व २२ ( २९९२.२७ वर्गगज) चिकित्सालय को दिए। अनियमित निर्माण पर जुर्माना वसूला गया। चिकित्सालय के पास भीलवाड़ा शहर एवं पालड़ी को जोडऩे के लिए पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। चिकित्सालय की ओर से वेस्ट वाटर नदी में छोड़ा जाना पाया गया।
२. राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल
चिकित्सालय के पीछे कोठारी नदी में जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट नहीं पाया गया। वेस्ट पानी आ रहा था। हालांकि कुछ स्थानों पर नगरीय ठोस अपशिष्ट, कंस्ट्रक्शन तथा डेमोलिशन वेस्ट तथा कंस्ट्रक्शन मेटेरियल स्टोन एग्रीगेट पड़ा पाया गया। नदी में निर्माण गतिविधियां भी पाई गई। नगर परिषद के नाले से वेस्ट वाटर व सिवेज नदी में छोड़ा जा रहा है।
३. नगर परिषद
शहर का कूड़ा-कचरा, मलबा जो नदी में पड़ा था, जिसको उठवा लिया गया। वर्तमान में कूड़ा-कचरा, मलबा नहीं पड़ा है। नाले, नालिया का गन्दा पानी नदी में जा रहा है। सीवरेज कार्य प्रगति पर है। कचरा नहीं डालने के लिए परिषद कर्मचारियों को पाबन्द कर दिया गया है।
४. तहसीलदार भू अभिलेख
पैमाइश के अनुसार नदी में चिकित्सालय का अतिक्रमण नहीं पाया। पालड़ी के खसरा-१८६८ में श्मशानघाट बना हुआ तथा कुछ जगह कचरा पड़ा हुआ है।
५. जल संसाधन उपखंड मातृकुण्डिया
जल संसाधन विभाग द्वारा चिकित्सालय के आस-पास नदी में जल प्रवाह में मौटे तौर पर कोई रुकावट नहीं पाई गई। सरकार के निर्देशानुसार नगर परिषद क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली जल संरचनाओं पर अधिकार या दायित्व स्वायत्तशासी संस्था का है।
विभाग ने यह की गड़बड़ी
कोठारी नदी जल संसाधन उपखंड भीलवाड़ा के अधीन है, जबकि रिपोर्ट मातृकुण्डिया के नाम दी गई। चित्तौडग़ढ़ जिले में स्थित मातृकुण्डिया बनास से जुड़ा है।
जलदाय विभाग
कलक्टर ने जलदाय विभाग से शहर में पेयजल स्रोत की स्थिति की रिपोर्ट मांगी। विभाग ने रिपोर्ट में बताया कि शहर के मुख्य पेयजल स्रोत चम्बल नदी, मेजा बांध व कंकरोलिया घाटी है। मेजा बांध कोठारी नदी पर शहर से १२ किलोमीटर दूर अपस्ट्रीम पर है। अपस्ट्रीम से नदी के सतही जल को जलशोधन संयंत्र से शोधित कर शहर में जलापूर्ति की जाती है। कंकरोलिया घाटी स्थित नलकूप व चम्बल नदी का स्रोत कोठारी नदी की परिसीमा में नहीं आते हैं। विभाग ने बताया कि शहर से गुजरने रही कोठारी नदी शहर का पेयजल स्रोत नहीं है।
जांच रिपोर्ट पर उठाया सवाल
सरकारी एजेंसियों की जांच रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता सज्जन सोडानी ने आपत्ति दर्ज कराई है। आपत्ति में उल्लेख किया गया है कि जांच करने वाली सभी एजेंसियां एनजीटी में दायर याचिका में विपक्षी के रूप में पक्षकार हैं। एेसे में इनकी जांच निष्पक्ष नहीं कही जा सकती है। यह प्राकृतिक न्याय के विपरीत है।