भीलवाड़ा

भीलवाड़ा में मिला राजस्थान का पहला लेप्टोस्पायरोसिस रोगी, घर में है इस खतरनाक बीमारी की जड़

Rajasthan First Leptospirosis Patient : राजस्थान का पहला लेप्टोस्पायरोसिस रोगी भीलवाड़ा में मिला। आप जानकर दंग रह जाएंगे कि इस खतरनाक बीमारी की जड़ आपके घर में है।
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Updated: 20 Jan 2024, 7:50 AM IST
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Rajasthan First Leptospirosis Patient

भीलवाड़ा में लेप्टोस्पायरोसिस का रोगी मिला है। यह खतरनाक मानी जा रही बीमारी का राजस्थान प्रदेश में पहला रोगी है। चूहों से होने वाली बीमारी खासतौर पर बच्चों को निशाना बनाती है। इस रोग से पीड़ित एक बालिका यहां के निजी अस्पताल में भर्ती है। भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ के माकडिया निवासी गायत्री शर्मा ने बताया कि उसकी साढ़े चार साल की बेटी को कुछ दिन पहले तेज बुखार आया। शरीर पर फफोले पड़ गए। माताजी मान घर पर इलाज किया। फिर मांडलगढ अस्पताल ले गए, जहां से भीलवाड़ा रैफर कर दिया। यहां निजी अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाया तो बेटी को भर्ती किया। कई जांच के बाद बीमारी पकड़ में नहीं आई। लेप्टोस्पायरोसिस की जांच करवाई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उस आधार पर इलाज किया गया। डॉक्टर का मानना है कि भीलवाड़ा जिले का ही नहीं बल्कि राजस्थान का संभवतया पहला मामला है।

शरीर के सभी अंग होते हैं प्रभावित

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल हेड़ा ने बताया लेप्टोस्पायरोसिस चूहे के मूत्र से बच्चों में फैलती है। इसमें डेंगू की तरह बुखार आएगा। शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है।

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हार्ट फेल होने का खतरा

डॉ अतुल हेड़ा ने आगे बताया पहले सामान्य बुखार होता है। लक्षण पांच से छह दिन बाद मिलते हैं। सही इलाज न मिले तो बुखार 10 से 15 दिन रहता है। कभी पीलिया तो कभी हार्ट फेल होने का खतरा रहता है। एक बालिका में यह रोग देखा गया है। अब वह ठीक है।

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20 Jan 2024, 7:50 AM IST
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