भीलवाड़ा

अच्छी खबर: नहीं चाहिए पांच-सात लोग, एक ही बचा सकता है रोगी की जान

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Separation Machine at Mahatma Gandhi Hospital in bhilwara
Separation Machine at Mahatma Gandhi Hospital in bhilwara

भीलवाड़ा।

महात्मा गांधी चिकित्सालय में सेपरेशन मशीन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। गत चार माह पहले शुरू हुई इस सुविधा से एक व्यक्ति के रक्त से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है। इससे पहले डेंगू मरीज के लिए 8 से 10 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती थी। रक्त लेने के बाद प्लेटलेट्स निकाले जाते थे। प्लेटलेट्स निकालने के बाद वह रक्त किसी को चढ़ाने लायक नहीं रहता था। अब सेपरेशन मशीन से केवल प्लेटलेट्स ही रक्त से बाहर आते हैं, बाकी रक्त वापस शरीर में चला जाता है।


अब नहीं जाना पड़ता बाहर
डेंगू रोगी को पहले जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद व कोटा जाना पड़ता था। कई बार बाहर ले जाते वक्त मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता था। भीलवाड़ा जिले में ये पहली मशीन है, जो एमजीएच के ब्लड बैंक में लगी हुई है।


इनको भी पड़ती है प्लेटलेट्स की जरूरत
प्लेटलेट्स की जरूरत केवल डेंगू रोगी को ही नहीं, बल्कि वायरल इन्फेक्शन, ब्लड कैंसर, मलेरिया के रोगियों को भी पड़ती है। इन बीमारियों के रोगियों में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार गिरती जाती है।


कौन दे सकता है प्लेटलेट्स
व्यक्ति प्लेटलेट्स दे सकता है जिसका वजन 60 किलो या ज्यादा हो। प्लेटलेट्स की संख्या भी कम से कम डेढ़ लाख होना जरूरी है। डोनर प्लेटलेट्स देने योग्य है या नहीं इसकी जांच लेब में सीबीसी के जरिये हीमोग्लोबिन, वजन व प्लेटलेट्स की जांच की जाती है।


अब तक चार ने किए प्लेटलेट्स डोनेट
सेपरेशन मशीन के माध्यम से चार माह में चार व्यक्तियों ने प्लेटलेट्स डोनेट किया। शुरुआत सहयोग सेवार्थ संस्थान के अध्यक्ष गोपाल विजयवर्गीय ने एक रोगी को प्लेटलेट्स देकर की। बाद में तीन और लोगों ने प्लेटलेट्स डोनेट किया।


72 घंटे में दुबारा दे सकते हैं प्लेटलेट्स
सेपरेशन मशीन से प्लेटलेट्स निकालने के बाद उसी रक्तदाता से 72 घंटे बाद वापस प्लेटलेट्स लिए जा सकते हैं। रक्तदान में तो रक्तदाता तीन माह बाद दूसरी बार रक्तदान कर सकता था। इधर, प्लेटलेट्स की संख्या अच्छी है तो वह व्यक्ति महीने में चार या इससे ज्यादा बार भी प्लेटलेट्स डोनेट कर सकता है।
साढ़े सात हजार का खर्चा

इस सुविधा के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को साढ़े सात व प्राइवेट में भर्ती मरीज को साढ़े नौ हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह राशि इस मशीन में उपयोग लिए जाने वाले किट की है, जो हर मरीज के साथ बदला जाता है। सरकार की ओर से ये किट नि:शुल्क नहीं होने के कारण मरीज को शुल्क वहन करना होता है।

पहले परिजन हो जाते थे परेशान
पहले एक दो यूनिट से ज्यादा व्यवस्था नहीं कर पाने से मरीज की जान पर बन आती थी। रिश्तेदारों व परिचितों के साथ ही संगठनों से रक्त देने की गुहार लगानी पड़ती थी।

मरीजों के लिए वरदान
एमजीएच के ब्लड बैंक में शुरू हुई यह सुविधा डेंगू मरीजों के लिए वरदान है। इस सुविधा में रोगी को पांच-छह लोगों को रक्तदान के लिए तैयार करने के बजाय एक ही व्यक्ति प्लेटलेट्स देने के लिए तैयार करना पड़ता है। जिन रोगियों को रक्तस्त्राव ज्यादा होता है, उनके लिए यह सुविधा अच्छी है।
डॉ. अनिल लढ़ा, प्रभारी ब्लड बैंक, एमजीएच, भीलवाड़ा

Published on:
03 Dec 2018 03:08 am