बजरी को लेकर जिले में बवाल बढ़ गया है। खान विभाग की सख्ती के बाद सरकारी विभागों ने अपने ठेकेदारों को पाबंद किया है कि वे बजरी का उपयोग नहीं करेंगे
भीलवाड़ा।
बजरी को लेकर जिले में बवाल बढ़ गया है। खान विभाग की सख्ती के बाद सरकारी विभागों ने अपने ठेकेदारों को पाबंद किया है कि वे बजरी का उपयोग नहीं करेंगे। उधर, सरकार का दबाव है कि जो भी निर्माण कार्य चल रहे हैं वे जल्द पूरे होने चाहिए। अब अफसर व जनप्रतिनिधि भी संशय में है कि आखिर बिन बजरी कैसे काम कराए। दो दिन पहले खान विभाग की सख्ती के बाद नगर विकास न्यास ने सभी ठेकेदारों को आदेश जारी किया है।
इसमें लिखा है वे अपने निर्माण कार्यों में बजरी काम में नहीं लेंगे। इस हालात में अब काम कराने में संकट पैदा हो गया है। परेशानी यह है कि अब बजरी के अभाव में यदि काम रोकेंगे तो उन पर पैनल्टी लगेगी, क्योंकि निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा करना है। इसी तरह यह पत्र अन्य विभागों को भी जारी किया है। इसमें बजरी का उपयोग नहीं करने की हिदायत दी गई है। उधर, हकीकत यह है कि बजरी का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा है, इसलिए कागजों में रोक लगी है जबकि बजरी का अवैध कारोबार और बढ़ गया है। अब सरकार ने जिला कलक्टरों को कमेटी गठित कर बजरी का उपयोग रोकने के आदेश जारी किए है।
बजरी काम में ली तो मुकदमा
यूआईटी ने अपने ठेकेदारों की ओर से बजरी काम में लेने पर मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। उधर, बिल्डर्स एसोएिशन ने भी बजरी काम में लेने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ २१ हजार रुपए का जुर्माना करना तय किया है। इन हालातों से अब बजरी के उपयोग से बच रहे हैं। इससे श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट हो गया है।अब ठप होंगे चार सौ करोड़ से अधिक के काम :बजरी पर सख्ती होने से अब नगर विकास न्यास व परिषद से जुड़े करीब चार सौ करोड़ के निर्माण कार्य ठप हो जाएंगे।पीडब्ल्यूडी, रमसा, एसएसए, चिकित्सा विभाग, जलदाय विभाग आदि विभागों के काम भी कराने में समस्या आ रही है। बजरी महंगी मिलने से ठेकेदार इससे बच रहे हैं। खनिज ट्रस्ट के टेंडर वाले काम भी शुरू नहीं हो पाए।
रोक, फिर भी आसानी से मिल रही बजरी
बजरी खनन पर १६ नवम्बर से ही रोक है। बजरी के उपयोग के संबंध में सरकार भी पहले हाथ खडे़ कर चुकी है। अब शहर में खुलेआम बजरी आ रही है। इस पर खान विभाग व पुलिस की कोई सख्ती नहीं है। शहर के पास मंगरोप थाना क्षेत्र की बनास नदी में तो मानो खुली छूट मिल गई है। यहां हालात है कि एक साथ दर्जनभर टे्रक्टर निकलते है। ये लोग शहर में महंगे भावों में बजरी बेच रहे हैं।