भीलवाड़ा

ऊंट पालकों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ

जिले में 4655 ऊंट, प्रदेश में 3.25 लाख  
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Sep 21, 2017
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ऊंट पालकों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ

भीलवाड़ा।

ऊंट के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में घटती संख्या को रोकने तथा प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्य सरकार ने ऊष्ट्र विकास योजना शुरू की है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में योजना का प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण ऊंट पालकों को इस योजना का लाभ नही मिल रहा है। इस योजना में हर ऊंटनी के बच्चा होने से लेकर डेढ़ साल तक कुल दस हजार रुपए देने का प्रावधान है, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा ऊंटों में होने वाले रोगाेें का भी सही समय पर उपचार नहीं हो पा रहा है। हालांकि विभाग की ओर से हर क्षेत्र में शिविर लगाकर उपचार किया जा रहा है।

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ऊंट के संरक्षण के लिए सरकार ने योजना के लिए 3135 लाख रुपए की राशि खर्च करने की योजना बनाई है। योजना के तहत ऊंट का नर या मादा बच्चा (टोडिया) होने पर पशुपालक को तीन किस्त में दस हजार रुपए उपलब्ध कराए जाएंगे। पशुगणना के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 3 लाख 25 हजार 713 ऊंटों की संख्या है। वही भीलवाड़ा जिले में 4 हजार 655 ऊंट हैं। योजना शुरू हुए काफी समय हो गया, लेकिन अभी तक ऊंटपालकों को इस योजना के बारे में जानकारी नही है। इससे ग्रामीण ऊंट पालक आज भी इस योजना से वंचित है। अक्टूबर 2016 के बाद में इस योजना का लाभ देय है, लेकिन एक साल होने के बाद भी जिले के कुछ गिने चुने पशुपालकों को ही इसका लाभ मिला है।


ऊंट के बच्चा होने के बाद एक माह के भीतर नजदीक के पशु चिकित्सकीय के प्रभारी से संपर्क कर निर्धारित प्रपत्र में ऊंटनी के बच्चे के जन्म की सूचना देनी होती है। ऊंटनी व बच्चे दोनों के टैंग लगवाकर टैगिंग सहित फोटो के साथ आवेदन करना होता है। इससे पशु का बीमा भी करवाया जा सकता है।यह मिलती सहायता सरकार की ओर से दवा भी शुल्क उपलब्ध करवाई जाती है । पंजीकृत ऊंटनी के बच्चे को एक माह की उम्र पर तीन हजार रुपए, नौ माह की उम्र पर तीन हजार रुपए तथा 18 माह की उम्र पूर्ण करने पर चार हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके लिए ऊंट पालक का पंजीकरण एवं आवेदन के साथ भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड और बैंक की डायरी की प्रति देना अनिवार्य है। सरकार से नहीं मिली रही कोई सहायता

वर्तमान में ऊंट पालना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसका दूध भी ज्यादा नही मिलता है। सरकार की ओर से किसी तरह की सहायता नहींं मिल रही है और ना ही इस योजना की कोई जानकारी है।
रामकिशन जाट, ऊंट पालक

103 ऊंटपालकों दी प्रथम किश्त
सरकार ने ऊंटों के संरक्षण के लिए उष्ट्र विकास योजना शुरू की है। इसमें अब तक 103 को प्रथम किश्त जारी की गई है, लेकिन बजट नहीं मिलने से दूसरी किश्त नहीं दी गई है। राशि मिलते ही दूसरी किश्त भी जारी कर दी जाएगी। करीब 500 ऊंटपालकों के आवेदन इस योजना के तहत प्राप्त हुए है।
भगवान सहाय, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग भीलवाड़ा

Published on:
21 Sept 2017 12:20 am