सीया के आदेश के खिलाफ लामबंद हुआ उद्योग जगत, सरकार से पुराने नियम बहाल करने की मांग प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए जहां सरकार आगामी बजट में नई राहें खोलने की तैयारी कर रही है, वहीं राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघान निर्धारण प्राधिकरण (सीया) का एक आदेश उद्यमियों के गले की फांस […]
प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए जहां सरकार आगामी बजट में नई राहें खोलने की तैयारी कर रही है, वहीं राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघान निर्धारण प्राधिकरण (सीया) का एक आदेश उद्यमियों के गले की फांस बन गया है। सुप्रीम कोर्ट की 24 फरवरी 2025 की रोक के बाद इंडस्ट्रियल शेड्स (केटेगेरी 8 ए और 8 बी) के लिए एनवायरनमेंट क्लियरेंस (ईसी) के रास्ते तो खुले, लेकिन अब 'बैंक गारंटी' की शर्त ने बाधा खड़ी कर दी है।
उद्योग जगत ने राज्य सरकार से मांग की है कि आगामी बजट घोषणाओं में या उससे पूर्व इस आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए, अन्यथा प्रदेश में नए प्रोजेक्ट्स की फाइनेंशियल वायबिलिटी (वित्तीय व्यवहार्यता) खतरे में पड़ जाएगी।
सीया ने अपने आदेश के तहत अनिवार्य कर दिया है कि ईसी जारी होने से पहले प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट को पौधरोपण की कुल लागत के बराबर बैंक गारंटी जमा करानी होगी। यह राशि 2 हजार रुपए प्रति पौध के हिसाब से तय की गई है। इसकी अवधि 5 साल के लिए वैध होगी। यह राशि तभी रिलीज होगी जब पौधारोपण पूरा होगा और 'सर्टिफाइड कंप्लायंस रिपोर्ट' जमा की जाएगी।
औद्योगिक संगठनों का कहना है कि एनवायरनमेंट क्लियरेंस एक 'कन्सेप्चुअल प्लानिंग' पर आधारित होती है। इसमें प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट पहले से ही एन्वायरनमेंट मैनेजमेंट प्लान के तहत पौधरोपण, वेस्ट-वॉटर ट्रीटमेंट और प्रदूषण नियंत्रण के लिए बाध्य होता है। उद्यमियों ने बजट पूर्व ज्ञापन में तर्क दिया है कि ईसी की शर्तों में स्पष्ट है कि नियम न मानने पर ईसी रद्द की जा सकती है। जब रद्दीकरण का प्रावधान पहले से है, तो एडवांस में भारी-भरकम बैंक गारंटी लेना अनुचित है।
वर्तमान में कंप्लायंस रिपोर्ट केवल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के रीजनल ऑफिस की ओर से विस्तार मामलों में ही जारी की जा रही है। ऐसे में नई इकाइयों के लिए बैंक गारंटी रिलीज करवाना टेढ़ी खीर साबित होगा।
मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स ने मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्रालय से गुहार लगाई है कि इस आदेश की समीक्षा की जाए। यदि सरकार प्रदेश को निवेश हब बनाना चाहती है, तो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत इस अनिवार्य बैंक गारंटी की शर्त को हटाया जाना चाहिए।