भीलवाड़ा

सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को सस्ते इलाज का लालच देकर निजी में ले जा रहा गिरोह

ट्रोमा व ऑर्थोपेडिक वार्ड से सबसे ज्यादा शिकायत
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The lure of cheap treatment in bhilwara
The lure of cheap treatment in bhilwara

भीलवाड़ा।

सरकारी अस्पताल एमजीएच में भर्ती मरीजों को सस्ते इलाज का लालच देकर शहर के निजी अस्पतालों में ले जाने वाला गिरोह सक्रिय है। गिरोह में निजी एंबुलेंस चालक व नर्सिंग स्टाफ शामिल है। चौंकाने वाली बात है कि मरीज जैसे ही सरकारी अस्पताल में भर्ती होता है, उसकी सूचना थोड़ी देर में निजी अस्पतालों को मिल जाती है।

वहां से दलाल सरकारी अस्पताल आकर मरीजों के परिजनों से मिलते हैं। उन्हें सस्ते इलाज का झांसा देकर निजी एंबुलेंस से लेकर चलते बनते हैं। भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राजन नंदा ने इसे गंभीर माना व इस मामले में एमजीएच के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी आगीवाल को पत्र लिखा। उनका कहना है कि १५ अप्रेल को अस्पताल के कुछ नर्सिंगकर्मियों ने उन्हें पत्र दिया था। उनकी शिकायत थी किट्रोमा, ऑर्थोपेडिक वार्ड में से निजी एंबुलेंस चालक भर्ती मरीजों को बाहर ले जाते हैं। मना करने पर स्टाफ से अभद्रता करते हंै।

सुविधाएं बढ़ी तो बढ़े मरीज

मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बनने के बाद एमजीएच में सुविधा बढ़ी है। लिहाजा दुगुने मरीज आने लगे। ट्रोमा वार्ड में हादसे के शिकार मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। सर्जरी आइसीयू भी जल्द शुरू होने वाली है। एमसीएच यूनिट से गर्भवती महिलाओं को राहत मिली है। सीजेरियन प्रसव के लिए भी विशेषज्ञ मौजूद हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में रोगियों का रूझान घट गया। एेसे में कमीशन आधारित गिरोह के सदस्य मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाने के लिए एमजीएच में घूमते हैं।

सुरक्षाकर्मियों की चूक

एमजीएच में यूं तो होमगार्ड तैनात हैं लेकिन वे इस ओर ध्यान नहीं देते। वे कहीं बैठकर टाइम पास करते नजर आते हैं या मोबाइल पर व्यस्त दिखते हैं। प्रशासन की सख्ती पर कई बार एंबुलेंसकर्मियों को वार्डों में जाने से रोकते भी है तो वह इन्हें धमकाकर घुस जाते हैं। परिसर में रोक के बावजूद एंबुलेंस खड़ी रहती है।

नर्सिंग स्टाफ देता है शह

मिली जानकारी के अनुसार, हादसों में घायल मरीज के आते ही वार्ड में मौजूद स्टॉफ एंबुलेंसकर्मियों को फोन कर सूचना देते हैं। कुछ समय बाद एंबुलेंसकर्मी मरीज के परिजनों को गुमराह कर वहां से निजी अस्पताल ले जाते है। वहां मरीज को ले जाने के बाद उन्हें अच्छा खासा कमीशन भी मिलता है।

यह करो उपाय

नंदा ने पीएमओ को लिखे पत्र में निर्देश दिया कि अस्पताल में जबरन प्रवेश करने वाले निजी एंबुलेंसकर्मियों को होमगार्डकर्मी रोके। यदि वे नहीं रूकते हैं तो शिकायत पुलिस चौकी में करे। वहां से राहत नहीं मिले तो सीधे पुलिस अधीक्षक को शिकायत करें। पुलिस चिकित्सालय परिसर से अवैध ठेले हटाए। उन पर कार्रवाई करनी होगी। अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के क्वार्टरों के सामने मवेशी बांधने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए।

एमजीएच में अवैध निजी एंबुलेंस के लिए पीएमओ को पत्र लिखा है। यहां से कमीशन के चक्कर में मरीजों को बाहर ले जाते हैं। इसमें स्टाफ को भी पाबंद करेंगे और एंबुलेंस चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

राजन नंदा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

Published on:
25 Apr 2019 07:13 am