मुनि ने बताए जीवन के 15 सूत्र, कहा, जिद छोडें, निर्भय होकर लक्ष्य की ओर बढ़ें
दिगंबर मुनि आदित्यसागर ने कहा कि हर व्यक्ति सुख और शांति की तलाश में भटक रहा है, लेकिन सच्चा सुकून बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही निहित है। भगवान और गुरु तो केवल उस आंतरिक शांति को जाग्रत करने की चाबी मात्र हैं। मुनि मंगलवार को तरणताल परिसर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनि ने जीवन में शांति के लिए आवश्यक 15 सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरल स्वभाव ही शांति का मूल आधार है। जो व्यक्ति सरल होता है, वह हर परिस्थिति में आनंद का अनुभव करता है। इसके विपरीत, जिद्दी स्वभाव व्यक्ति को अशांति की ओर ले जाता है। जिद के कारण ही जीवन में मायाचार और अन्य दोष प्रवेश कर जाते हैं, जो पतन का कारण बनते हैं।
ट्रस्ट सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि मुनि संघ का प्रवास कार्यक्रम अब नए पड़ाव की ओर है। बुधवार सुबह धर्मसभा में 17 से 19 जनवरी तक होने वाले भक्तामर विधान के लिए पात्रों का चयन किया जाएगा। वही बुधवार शाम 4 बजे मुनि संघ का आरके कॉलोनी जैन मंदिर से तिलक नगर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार होगा। गुरुवार को मुनि संघ के सानिध्य में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान को वेदी में विराजमान करने के विशेष अनुष्ठान होंगे।
ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि सुबह की सभा में प्रसन्नसागर भक्त परिवार के चैनसुख व मनोज कुमार अजमेरा ने मुनि आदित्य सागर महाराज के पाद प्रक्षालन किया। वहीं, इंदौर निवासी विपुल बड़जात्या ने शास्त्र भेंट कर सायंकालीन आरती की।