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राजस्थान के ये गांव: यहां जन्म से ही युवाओं में कूट-कूट कर भर दी जाती है देशभक्ति, सरहद की रक्षा का जज्बा बनी पहचान

राजस्थान का ऐसा गांव जहां बचपन से ही देशभक्ति रग-रग में भर दी जाती है। गाडोली, टीकड़, अमरवासी और लुहारी गांवों की मिट्टी में सरहद की सुरक्षा का जज्बा बसता है। शेखावटी के बाद यहां से करीब 90 प्रतिशत युवा सेना में हैं। इसलिए जहाजपुर उपखंड को सैनिकों का गांव कहा जाता है।

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Rajasthan Soldier Village

पूर्व सैनिक चर्चा करते हुए (फोटो- पत्रिका)

जहाजपुर (भीलवाड़ा): राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील को यूं ही “वीर सैनिकों की भूमि” नहीं कहा जाता। यह वह पावन धरा है, जहां की मिट्टी में देशभक्ति रची-बसी है और हर गांव में तिरंगे की शान के लिए जीने-मरने का जज्बा पलता है।

यहां के गांवों से निकलकर बड़ी संख्या में जवान भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों में देश की सीमाओं पर तैनात हैं। गाडोली, टीकड़, अमरवासी और लुहारी गांव में हर घर से नौजावान सीमा पर देश की रक्षा कर रहा। यहां जन्म से बच्चों में कूट-कूट कर देशभक्ति की भावना भरी जाती है।

इन गांवों के कई सैनिक देश की सेवा करते हुए सीमा पर दुश्मन से लोहा लेकर वीरगति को प्राप्त हो गए। इनकी शहादत को आज भी सलाम किया जाता है। राजस्थान में शेखावटी के बाद जहाजपुर क्षेत्र ऐसा है, जहां नब्बे प्रतिशत सैनिक यहां से आते हैं। इसलिए जहाजपुर को सैनिकों के गांव के नाम से भी जाना जाता है।

छुट्टी पर आते ही स्वागत में पलक पावड़े

गांवों में जब भी कोई जवान छुट्टी पर घर आता है, तो पूरा गांव गर्व से उसका स्वागत करता है। स्कूलों में बच्चों को शहीदों और सैनिकों की कहानियां सुनाई जाती हैं, ताकि देशभक्ति की यह परंपरा यूं ही आगे बढ़ती रहे। जहाजपुर तहसील वीरता, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की जीवंत पहचान है।

यहां हर दिल “भारत माता की जय” के उद्घोष से धड़कता है। यहां वीरांगनाएं और बुजुर्ग वीर सेनानियों की कहानी सुनाकर बच्चों को बड़ा करते हैं। इन गांवों के हर घर से एक या दो सदस्य सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।

ताकि जहन में रहे यादें, अपने खर्चे पर बनवाए स्मारक

सरकार ने यहां के शहीदों की याद में स्मारक बनवाने की घोषणा की, लेकिन कई शहीदों की याद में स्मारक नहीं बनवाए। ग्रामीणों ने यादों को जहन में रखने के लिए गांव में अपने खर्चाें पर स्मारक बनवा रखे है।

एक हजार जवान तैनात, युवा पीढ़ी कर रही मेहनत

वर्तमान जहाजपुर क्षेत्र से 662 जवान सीमा पर तैनात हैं। जबकि 400 से अधिक युवा अग्निवीर में भर्ती होकर सेवा दे रहे हैं। यहां के कई युवा सेना में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। इसके लिए सेवानिवृत्ति सैनिक ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। सुबह जल्दी उठकर दस किलोमीटर दौड़ लगवाई जाती है।