गारनेट के नाम पर फर्जीवाड़े का 'महाजाल', सरकारी के गजट में जिक्र नहीं फिर भी कट रही टीपी
सुरेश जैन
प्रदेश में बजरी और मैसनरी स्टोन के परिवहन नियमों में स्पष्टता लाने के लिए सरकार की ओर से जारी किया गया नया आदेश अब विवादों के घेरे में है। सरकार ने जिन चार खनिजों के लिए टीपी (ट्रांजिट पास) का प्रावधान किया, उनमें गारनेट का कहीं उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद प्रदेश में 200 से अधिक डीलर टीपी के माध्यम से गारनेट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने और बेचने का फर्जी खेल कर रहे हैं।
प्रदेश में गारनेट मेजर मिनरल है। ऐसे में कोई भी लीजधारक या डीलर टीपी नहीं काट सकता है। सरकार ने इसे और साफ करने के लिए 15 माह पूर्व एक आदेश जारी किया था। इसके बावजूद प्रदेश में वर्तमान में 209 टीपी डीलर अभी भी पंजीकृत हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब नियम ही स्पष्ट हैं, तो ये डीलर किस आधार पर काम कर रहे हैं। इस खेल की जानकारी सभी अधिकारियों को है।
राजस्थान सरकार ने 3 जनवरी 2025 को राजपत्र (गजट) जारी कर नियम 92 में संशोधन किया था। इस नए प्रावधान के तहत माइनर खनिजों के लिए ही टीपी जारी करने का स्पष्ट प्रावधान किया है। इसमें बजरी, मैसनरी स्टोन, गिट्टी, ग्रिट, क्रशर डस्ट, तथा एम-सैंड (कृत्रिम रेत) शामिल है। गारनेट का कोई उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद फर्जी तरीके से गारनेट के लिए टीपी का उपयोग करना गंभीर अनियमितता है।
खान विभाग के अनुसार प्रदेश में 200 से अधिक डीलर हैं। सबसे अधिक भीलवाड़ा 67, सावर 33. बिजौलियां 24, राजसमंद व आमेट 16, ब्यावर 12, जयपुर 8, टोंक 6, अजमेर 4, सोजत 3, दौसा, नीमकाथाना तथा चित्तौड़गढ़ में 1-1 है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी 25 से अधिक पंजीकृत डीलर हैं जो टीपी के माध्यम से गारनेट का खेल कर रहे हैं। भीलवाड़ा में तीन लीज हैं। कोटड़ी क्षेत्र में तो पिछले कई सालों से लीज में काम ही नहीं हुआ फिर भी रवन्ना काटे जा रहे हैं। ओडियाखेड़ा में सबसे अधिक अवैध गारनेट को वैध बताया है। गारनेट के मामले को लेकर जयपुर मुख्यालय के उच्च अधिकारियों ने शनिवार को भीलवाड़ा के अधिकारियों को फटकार लगाई है। अब यहां टीपी पाइंट का वेरिफिकेशन करने के साथ माल कहां से आया और कहां गया इसकी जांच भी शुरू कर दी है।