बड़ा सवाल: 670 कट्टे आए, 360 की पर्ची कटी; आखिर कहां गायब हो गई यूरिया की आधी खेप?
भीलवाड़ा जिले में यूरिया की किल्लत अब किसानों के सब्र का बांध तोड़ रही है। सोमवार को क्रय-विक्रय सहकारी समिति में खाद वितरण के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब किसानों ने व्यवस्थापक पर खाद की कालाबाजारी और चहेतों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए। किसानों का आक्रोश देख समिति परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
किसान ओमप्रकाश जाट ने बताया कि समिति में कुल 670 यूरिया के कट्टे आए थे। व्यवस्थापक ने केवल 180 पर्चियां काटीं और प्रति किसान दो कट्टे वितरित किए। इस हिसाब से केवल 360 कट्टों का हिसाब सार्वजनिक हुआ, जिसके तुरंत बाद 'खाद खत्म' होने की घोषणा कर दी गई। किसानों ने जब इसका विरोध किया और गोदामों की जांच की मांग की, तो एक कमरे में छिपाकर रखे गए 31 कट्टे बरामद हुए। भारी विरोध के बाद इन कट्टों का वितरण भी दबाव में करना पड़ा।
हंगामे पर सफाई देते हुए समिति के व्यवस्थापक रामप्रसाद तेली ने स्वीकार किया कि 31 कट्टे किसी उच्च अधिकारी के कहने पर अलग रखवाए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुबह भीड़ बढ़ने से पहले 100 से अधिक लोगों को बिना पर्ची के ही खाद बांट दी गई थी। हालांकि, किसान इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखे। किसान सम्पत सिंह, करणसिंह और गिरजा कंवर का सीधा आरोप है कि व्यवस्थापक ने अपने चहेतों को पिछले दरवाजे से खाद मुहैया कराई है।
व्यवस्थापक तेली ने क्षेत्र में खाद के गहरे संकट को स्वीकार करते हुए बताया कि भीलवाड़ा तहसील की 23 ग्राम सहकारी समितियां इस केंद्र के अधीन आती हैं। इन समितियों में खाद की आपूर्ति ठप होने के कारण सारा दबाव मुख्य केंद्र पर आ गया है। वर्तमान में 10 हजार बैग की सख्त दरकार है, जबकि आपूर्ति मात्र 670 बैग की हुई है।
किसानों का कहना था कि जब खाद आती है तो हमें पर्चियों के लिए लाइनों में खड़ा कर दिया जाता है, और पीछे के दरवाजे से स्टॉक खाली हो जाता है। हम अपनी फसल बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। और व्यवस्थापक अपने चेहते तो खाद बांट रहा है। लेकिन अधिकारी इस और ध्यान तक नहीं दे रहे है। जांट ने बताया कि समिति के बाहर सुबह 8 बजे से ही किसान कतारों में लग गए थे। कड़कड़ाती ठंड में नंबर आने का इंतजार कर रहे अन्नदाता को जब 'स्टॉक खत्म' होने की घोषणा की तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।