भीलवाड़ा

अमरीका-बांग्लादेश ‘ट्रेड डील’ से राजस्थान के टेक्सटाइल की बढ़ी धड़कनें

भीलवाड़ा के यार्न बाजार पर संकट; 5 हजार करोड़ के निर्यात पर असर की आशंका सुरेश जैन अमरीका और बांग्लादेश के बीच 9 फरवरी को हुए रेसिप्रोकल ट्रेड डील ने भारतीय टेक्सटाइल जगत, विशेषकर राजस्थान के स्पिनिंग मिल मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश को अब अमरीका में रेडीमेड गारमेंट्स […]

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Feb 17, 2026
US-Bangladesh trade deal boosts Rajasthan's textile sector

भीलवाड़ा के यार्न बाजार पर संकट; 5 हजार करोड़ के निर्यात पर असर की आशंका

सुरेश जैन

अमरीका और बांग्लादेश के बीच 9 फरवरी को हुए रेसिप्रोकल ट्रेड डील ने भारतीय टेक्सटाइल जगत, विशेषकर राजस्थान के स्पिनिंग मिल मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश को अब अमरीका में रेडीमेड गारमेंट्स निर्यात करने पर 19 प्रतिशत की बड़ी ड्यूटी से राहत मिलेगी, लेकिन इसकी एक छिपी हुई शर्त भारतीय कॉटन और यार्न बाजार के लिए 'झटका' साबित हो सकती है।

क्या है समीकरण?

वर्तमान में बांग्लादेश से अमरीका जाने वाले गारमेंट्स पर कुल 31 प्रतिशत ड्यूटी लगती है (12 प्रतिशत बेसलाइन तथा 19 प्रतिशत जनरल रेसिप्रोकल ड्यूटी)। नई डील के बाद यह 19 प्रतिशत ड्यूटी शून्य हो जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस छूट का लाभ लेने के लिए बांग्लादेश, भारतीय यार्न के बजाए अमरीका कॉटन या यार्न को प्राथमिकता दे सकता है।

राजस्थान की स्पिनिंग मिलों पर सीधा असर

राजस्थान के भीलवाड़ा, बांसवाड़ा और भवानी मंडी जैसे क्षेत्र बांग्लादेश को सालाना लगभग 5 हजार करोड़ रुपए का कॉटन यार्न निर्यात करते हैं। बांग्लादेश अपनी जरूरत का 82 से 85 प्रतिशत यार्न भारत से खरीदता है। यदि बांग्लादेश ने अमरीका से कच्चा माल लेना शुरू किया, तो भीलवाड़ा की अत्याधुनिक मिलों के ऑर्डर में बड़ी गिरावट आ सकती है।

राहत की बात: दूरी और गुणवत्ता बनेगी ढाल

हालांकि, तस्वीर पूरी तरह धुंधली नहीं है। बांग्लादेश की अपनी मिलें अभी भी पुरानी तकनीक से 9 से 20 काउंट पर निर्भर हैं, जबकि वहां के गारमेंट उद्योग को 20 से 40 काउंट के विशेष यार्न की जरूरत होती है। भीलवाड़ा की मिलें इसी हाई-क्वालिटी यार्न की आपूर्ति करती हैं। अमरीका से माल मंगाने पर लगने वाला भारी समुद्री भाड़ा और लंबा समय भी भारतीय निर्यातकों के पक्ष में जा सकता है।

एक्सपर्ट व्यू

अमरीका-बांग्लादेश ट्रेड डील के बाद निश्चित रूप से समीकरण बदलेंगे। यदि बांग्लादेश ड्यूटी लाभ के लालच में अमरीका से यार्न आयात को बढ़ावा देता है, तो भीलवाड़ा की स्पिनिंग मिलों के लिए यह बड़ा झटका होगा। हालांकि, सड़क मार्ग से त्वरित आपूर्ति और हमारे यार्न की विशेष गुणवत्ता कॉम्पेक्ट व मिलांज के कारण हम अभी भी दौड़ में बने हुए हैं। उद्योग की नजर अब लॉजिस्टिक्स लागत और आगामी मांग पर टिकी है।

- आरके जैन, महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

  • तुलनात्मक स्थिति: भारत वर्सेज अमरीका
  • विवरण: भारतीय यार्न (राजस्थान) अमरीका की यार्न / अन्य
  • परिवहन: सड़क मार्ग से सस्ता व तेज समुद्री मार्ग 6000 किमी दूर
  • सुविधा: छोटे लॉट में भी आपूर्ति संभव केवल बड़े कंसाइनमेंट
  • तकनीक: कॉम्पेक्ट, मिलांज, कॉम्बड यार्न सीमित विकल्प
  • लागत: बांग्लादेशी मिलों से 30 प्रतिशत सस्ती ड्यूटी लाभ के कारण प्रतिस्पर्धी
Updated on:
17 Feb 2026 09:58 am
Published on:
17 Feb 2026 09:57 am
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