भीलवाड़ा

भक्ति के स्वर और आस्था का सैलाब: भीलवाड़ा में भक्तामर महामंडल विधान का आगाज

- मुनि आदित्य सागर व अप्रमित सागर के सान्निध्य में गूंजे भक्तामर के श्लोक - 400 से अधिक श्रद्धालुओं ने चढ़ाए अर्घ्य; रत्नों की हुई वृष्टि

less than 1 minute read
Jan 17, 2026
The beginning of the Bhaktamar Mahamandal Vidhan in Bhilwara

भीलवाड़ा शहर के आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के तत्वावधान में शनिवार को भक्तामर महामंडल विधान का भक्तिमय वातावरण में शुभारंभ हुआ। तरणताल परिसर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रुतसंवेगी महाश्रमण मुनि आदित्य सागर एवं अप्रमित सागर के सान्निध्य में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। विधान के पहले दिन लगभग 400 से अधिक श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ लिया।

ध्वजारोहण के साथ मंगल शुरुआत

विधान की शुरुआत चांदबाई, नरेश, नितिन और पीयूष गोधा की ओर से ध्वजारोहण के साथ की गई। भक्ति संगीत की लहरों के बीच विधान मंडल पर प्रथम मुख्य कलश स्थापना का सौभाग्य शांतिलाल-मंजू शाह सौधर्म इंद्र व शची इंद्राणी को मिला। इसके साथ ही कुबेर इंद्र ओम चंद रिखबचंद बाकलीवाल, चक्रवर्ती इंद्र शुभ काला, बाहुबली इंद्र राकेश पहाड़िया और महायज्ञनायक इंद्र अभिषेक पाटनी ने भी कलश स्थापना की। आयोजन के दौरान घन कुबेर अजय बाकलीवाल द्वारा रत्नों की वृष्टि का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा।

भक्तामर महिमा: कष्टों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का मार्ग

इस दौरान मुनि आदित्य सागर ने कहा कि भक्तामर महामंडल विधान की महिमा अपार है। यह विधान आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा रचित 48 श्लोकों पर आधारित एक शक्तिशाली अनुष्ठान है।

सुमधुर प्रस्तुतियों के बीच समर्पित किए अर्घ्य

विधान की प्रक्रिया के दौरान मुनि अप्रमित सागर की सुमधुर और संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भव्य मंडप में अखंड दीप प्रज्ज्वलन के साथ पात्रों ने जल, फल, पुष्प और नैवेद्य के माध्यम से 48 विशेष अर्घ्य समर्पित किए। शाम को आयोजित 'श्रुत समाधान' और मुनि की संगीतमय आरती में भी श्रद्धालु उमड़े।

Published on:
17 Jan 2026 08:51 pm
Also Read
View All

अगली खबर