लव जिहाद और संपत्ति के लालच में फंसाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कानून में बदलाव की मांग विधानसभा में बुधवार को नियम 295 के तहत एक अहम सामाजिक और कानूनी मुद्दा गूंजा। भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत संपत्ति अधिकारों के दुरुपयोग का मामला उठाते हुए सरकार से […]
विधानसभा में बुधवार को नियम 295 के तहत एक अहम सामाजिक और कानूनी मुद्दा गूंजा। भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत संपत्ति अधिकारों के दुरुपयोग का मामला उठाते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है। कोठारी ने सदन में तर्क दिया कि जो बेटियां अपनी मर्जी से अन्य समाज में शादी कर लेती हैं और कोर्ट में अपने ही माता-पिता को पहचानने से इनकार कर देती हैं, उन्हें पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने पर रोक लगनी चाहिए।
विधायक ने चिंता जताई कि माता-पिता से रिश्ता तोड़ने के बावजूद, उनकी मृत्यु के बाद कानूनन हकदार होने के कारण बेटी का नाम जमीन-जायदाद के नामांतरण में दर्ज हो जाता है। कोठारी ने कहा कि ऐसी बेटियां मौके पर तो नहीं आतीं, लेकिन बाद में अपने हिस्से की जमीन परिवार के अलावा किसी अन्य को बेच देती हैं। इससे परिवार और न्यायालयों में विवाद बढ़ते हैं।
विधायक ने सदन में स्पष्ट कहा कि ऐसे विवादों पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान काश्तकारी अधिनियम एवं भू-राजस्व अधिनियम में प्रावधान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उक्त कानून निर्माण के बाद लव जिहाद एवं कई बार संपत्ति के लालच में मासूम बच्चियों को फंसाए जाने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
कोठारी ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए सवाल उठाया कि जब न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने बच्ची अपने माता-पिता से रिश्ता तोड़ देती है, तो उसके बाद पिता की संपत्ति के नामांतरण में उसको अधिकार देना कहां तक उचित है। उन्होंने मांग की है कि प्रदेश में इस तरह के बढ़ते मामलों को देखते हुए विरासत के नामांतरण में ऐसी लड़कियों के नाम दर्ज करने पर नियंत्रण किया जाना अति आवश्यक है।