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राजस्थान का अनोखा मंदिर, जहां सोने की जेसीबी से चांदी के ट्रक तक चढ़ाते हैं भक्त

मंदिर के खजाने में सोने-चांदी से बने जेसीबी, एलएनटी मशीन, ट्रक, बस, लग्जरी कार और बुलेट मोटरसाइकिल के मॉडल मिलते हैं। वहीं कुछ भक्त सोने-चांदी के लैपटॉप या एटीएम मशीन के छोटे मॉडल अर्पित करते हैं।

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भीलवाड़ा

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Kamal Mishra

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सुरेश आमेटा

Mar 07, 2026

Sanwaliya Seth Temple

श्री सांवलियाजी मंदिर (फोटो-पत्रिका)

भीलवाड़ा। मेवाड़ में स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर केवल एक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपने अनूठे चढ़ावे के कारण भी अलग पहचान रखता है। यहां भक्त भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए कई बार ऐसे एंटिक मॉडल और प्रतीकात्मक वस्तुएं अर्पित करते हैं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

सोने-चांदी से बने ट्रैक्टर, ट्रक, जेसीबी, बस, लैपटॉप या यहां तक कि एटीएम मशीन के मॉडल भी इस आस्था का हिस्सा बन चुके हैं। मंदिर में चढ़ने वाली ये वस्तुएं केवल धातु की कलाकृतियां नहीं, बल्कि भक्तों की निजी सफलताओं, उम्मीदों और कृतज्ञता का प्रतीक मानी जाती हैं।

मशीनी युग की प्रतीकात्मक भेंट

मंदिर के खजाने में सोने-चांदी से बने जेसीबी, एलएनटी मशीन, ट्रक, बस, लग्जरी कार और बुलेट मोटरसाइकिल के मॉडल मिलते हैं। वहीं डिजिटल युग की झलक भी यहां दिखती है, जहां कुछ भक्त सोने-चांदी के लैपटॉप या एटीएम मशीन के छोटे मॉडल अर्पित करते हैं। यहां तक की चांदी का पेट्रोल पंप भी इस दिव्य इन्वेंट्री का हिस्सा है।

किसान भी अर्पित करते हैं अपनी पहली उपज

मेवाड़ क्षेत्र में खेती से जुड़े कई परिवार अक्सर अपनी नई फसल का पहला हिस्सा भगवान को अर्पित करते हैं। गेहूं की बालियां, लहसुन, प्याज या अफीम के डोडे जैसे प्रतीकात्मक चढ़ावे यहां देखने को मिलते हैं। कुछ भक्त इन फसलों के सोने-चांदी से बने मॉडल भी चढ़ाते हैं।

राजसी वस्तुएं भी बनती हैं श्रद्धा का माध्यम

मंदिर में समय-समय पर सोने-चांदी के रथ, सिंहासन, झूमर, एंटीक गुलदस्ते व बर्तन, केसर के थाल और रत्नजड़ित मुकुट भी भेंट करते हैं। हाथी-घोड़े के जोड़े, भगवान के चरणचिह्न (पगलिए) या झूले जैसी कलात्मक भेंट भी यहां की विशेषता मानी जाती है।

आस्था का ब्लैक गोल्ड

सेठ के दरबार में कई किसान ब्लैक गोल्ड (अफीम) की अनूठी भेंट भी करते हैं। ऐसी भेंट को मंदिर मंडल पूरी पारदर्शिता के साथ नारकोटिक्स विभाग को सुपुर्द करता है। वर्ष 2025 में भक्तों की चढ़ाई गई लगभग 58 किलोग्राम अफीम को नियमानुसार नारकोटिक्स विभाग को सौंपा गया।

श्रद्धा का भाव ही सबसे बड़ा

यहां चढ़ावे का महत्व उसकी कीमत से अधिक उस भाव में होता है, जिसके साथ भक्त इसे अर्पित करता है। कई भक्त अपनी सफलता या खुशी के प्रतीक के रूप में ये मॉडल चढ़ाते हैं और इसे भगवान के प्रति कृतज्ञता जताने का एक माध्यम मानते हैं। -हजारीदास वैष्णव, अध्यक्ष, श्रीसांवलियाजी मंदिर मंडल