भीलवाड़ा

बदलाव की बयार: अब ‘ड्रोन’ छिड़क रहा खाद और ‘सौर ऊर्जा’ से लहलहा रहे खेत

सरकारी मदद से हाईटेक हुआ अन्नदाता, एआई का करने लगे उपयोग कभी मौसम की मार तो कभी बिजली की किल्लत से जूझने वाला प्रदेश का किसान अब ‘स्मार्ट’ हो गया है। खेतों में अब बैलों की जगह आधुनिक मशीनों ने ले ली है और यूरिया के छिड़काव के लिए घंटों पसीना बहाने के बजाय ‘ड्रोन’ […]

2 min read
Feb 08, 2026
Winds of change: Now 'drones' are spraying fertilizers and fields are flourishing with 'solar energy'.

सरकारी मदद से हाईटेक हुआ अन्नदाता, एआई का करने लगे उपयोग

कभी मौसम की मार तो कभी बिजली की किल्लत से जूझने वाला प्रदेश का किसान अब 'स्मार्ट' हो गया है। खेतों में अब बैलों की जगह आधुनिक मशीनों ने ले ली है और यूरिया के छिड़काव के लिए घंटों पसीना बहाने के बजाय 'ड्रोन' का इस्तेमाल हो रहा है। कृषि में आए इस क्रांतिकारी बदलाव में सरकारी योजनाओं की भूमिका संजीवनी साबित हो रही है। सरकार की ओर से कृषि यंत्रों, सोलर पंप और आधुनिक तकनीक पर दी जा रही सब्सिडी (अनुदान) ने किसानों की राह आसान कर दी है। जो तकनीक कभी आम किसान की पहुंच से दूर थी, आज सरकारी मदद से वह हर खेत तक पहुंच रही है। इस योजना के तहत शाहपुरा क्षेत्र के 300 किसानों को जोड़ा गया है। सफलता मिलने पर समूचे जिले के किसानों को जोड़ा जाएगा।

ड्रोन तकनीक: समय और सेहत दोनों की बचत

कृषि विभाग के अनुसार नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिस काम में पहले पूरा दिन लगता था, अब वह 15-20 मिनट में हो रहा है। रसायनों के सीधे संपर्क में न आने से किसानों के स्वास्थ्य पर बुरा असर भी नहीं पड़ रहा। सरकार ड्रोन खरीद पर आरक्षित वर्ग और लघु-सीमांत किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।

कुसुम योजना: बिजली के बिल से मिली आजादी

पीएम कुसुम योजना ने बंजर पड़ी जमीनों को भी आबाद कर दिया है। सरकार की ओर से सोलर पंप लगाने पर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। किसानों को अब दिन में सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ता। डीजल पंप का खर्च खत्म होने से खेती की लागत में भारी कमी आई है।

पॉली हाउस और ड्रिप इरिगेशन ने बदली तस्वीर

भीलवाड़ा जैसे जिलों में जहाँ भूजल स्तर गिर रहा है, वहां सरकारी अनुदान पर आधारित 'ड्रिप इरिगेशन' (बूंद-बूंद सिंचाई) और 'मिमी स्प्रिंकलर' वरदान साबित हुए हैं। वहीं, संरक्षित खेती पॉली हाउस-ग्रीन हाउस के लिए मिल रहे 50 से 70 प्रतिशत अनुदान ने किसानों को बेमौसम सब्जी और फूलों की खेती के लिए प्रेरित किया है। इससे उनकी आय में दुगुना इजाफा हुआ है।

एआई का उपयोग

फसलों में सिंचाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सटीक सलाह लेने लगे हैं। सरकार ने जिले के 400 किसानों को इस नवाचारी एआई-आधारित तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। एआई का उपयोग ई-कॉमर्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, विपणन, खगोल विज्ञान, खेल, बैंक और सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। एआई और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग करके किसानों को सटीक सिंचाई की सलाह देता है। यह एक हार्डवेयर-मुक्त, क्लाउड समाधान है।

कृषि यंत्रों पर मिल रहा अनुदान

तकनीकी नवाचार ही कृषि का भविष्य है। सरकार का उद्देश्य खेती की लागत को कम करना और उत्पादन बढ़ाना है। किसान साथी ई-मित्र या राज किसान साथी पोर्टल के जरिए पाइपलाइन, फव्वारा, सोलर पंप और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए आवेदन कर लाभ उठा सकते हैं।

-शंकरसिंह राठौड़, उपनिदेशक, उद्यान

भीलवाड़ा फैक्ट फाइल

  • तकनीक/यंत्र सरकारी अनुदान मुख्य लाभ
  • कृषि ड्रोन 40 से 75 प्रतिशत सटीक छिड़काव, समय की बचत
  • सोलर पंप (कुसुम) 60 प्रतिशत फ्री बिजली, डीजल खर्च शून्य
  • पॉली हाउस 50 से 70 प्रतिशत संरक्षित खेती, 3-4 गुना ज्यादा उत्पादन
  • कृषि यंत्र 40 से 50 प्रतिशत श्रम की बचत, बुवाई में आसानी
  • डिग्गी निर्माण 75 से 85 प्रतिशत वर्षा जल संचयन, सिंचाई सुविधा
Published on:
08 Feb 2026 09:02 am
Also Read
View All

अगली खबर