
भीलवाड़ा .
विषम परिस्थियों के बावजूद उद्यमी उद्योग का संचालन शुरू करना चाहते है तो तथाकथित लोगों के बहकावे में आकर श्रमिक उद्योग को बन्द करवा रहे है। वस्त्रनगरी के लगभग सभी उद्योग ५४ दिनों से बन्द है। सरकार व जिला प्रशासन चाहते है कि उद्योग चले ताकि लोगों को रोजगार मिले। उनकी जिन्दगी पटरी पर आ सके। लेकिन उद्योग किसी साजिश का शिकार होते नजर आ रहे है। श्रमिकों का कहना है कि उन्हें अप्रेल माह का पूरा वेतन देवे। जबकि सभी औद्योगिक संगठन पहले ही सरकार को पत्र लिखकर यह अवगत करवा चुके है कि वे अप्रेल माह का वेतन देने में सक्षम नहीं है। कुछ उद्योगों ने मानदेय के रूप में २००० से २६०० रुपए का भुगतान किया है। उसके बाद भी उद्योग को बन्द करवा रहे है।
चित्तौड़ रोड स्थित संगम प्रोसेस में ८ मई से कपड़ा प्रोसेस का काम शुरू हुआ। संग्रम की ओर से अभी तक एक मीटर कपड़े का डिस्पेच नहीं किया है। उद्योग शुरू होने से ६०० लोगों को दो शिफ्ट में काम मिल रहा था। गुरुवार को भुगतान की मांग को लेकर श्रमिकों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते प्रोसेस हाउस बन्द हो गया। श्रमिकों का कहना है कि उन्हें भुगतान नहीं किया है। उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा है। कुछ श्रमिकों ने दबी जुबान से कहा कि कुछ लोग जबरन काम बन्द करवा रहे है। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने कहा कि 20 मार्च से प्रोसेस हाउस बंद था। लेकिन अप्रेल माह का वेतन नहीं दिया। प्रोसेस हाउस खुला हैं तो वेतन देने का आश्वासन देवे। इसी मांग को लेकर काम बन्द कर दिया गया।
श्रमिक को रोजगार मिले इसी उद्धेश्य से शुरू किया काम
संगम प्रोसेस के निदेशक वीके सोडानी ने बताया कि कोरोना के कारण उद्योगों के हालात ठीक नहीं है। लम्बे समय से उद्योग बन्द रहने के बाद प्रशासन के आग्रह पर प्रोसेस हाउस में काम शुरू किया। एक मीटर कपड़े की मांग नहीं है। श्रमिकों को रोजागर मिले ताकि उनकी आजिविका चल सके यहीं सोचकर हमने प्रोसेस चालू किया है।कुछ श्रमिकों को मानदेय दे दिया है कुछ को गुरुवार को जारी कर दिया। श्रमिक चाहे कि उन्हें रोजागर चाहिए तथा उद्योग चले तो उनके लिए हमेशा दरवाजे खुले हुए है। श्रमिक जब चाहे काम पर आ सकते है।
................
चार विविंग उद्योग के थमे फिर चक्के
उद्योगपति उद्योग चलाना चाहते है, लेकिन अप्रेल माह के वेतन से नया संकट खड़ा हो गया। इसके चलते चार विविंग उद्योग फिर बन्द हो गए है। उद्यमियों ने अप्रेल माह का मानदेय दे दिया था। बुधवार को प्राइमरा सल्ज सुटिंग में काम शुरू हो गया था। मशीनों पर कपड़ा बूना जाने लगा था, लेकिन कुछ लोग वहां पहुंचे और फैक्ट्री मैनेजर से मजदूरों को अप्रेल माह का वेतन की मांग की। मैनेजर ने बताया कि मजदूरों को मानदेय राशि दे दी है। फैक्ट्री मालिक आरपी झंवर ने आश्वासन दिया कि एक हजार रुपया और दे दिया जाएगा। लेकिन श्रमिक संगठन ने विरोध करना शुरू कर दिया और वेतन की मांग की। इस पर फैक्ट्री में काम रोक दिया गया। झंवर ने भीलवाड़ा विविंग मिल्स एसोसिएशन को जानकारी दी है। कनक सुटिंग सहित दो अन्य उद्यमियों ने काम शुरू करने के लिए मास्टर व कर्मचारियों को बुलाया, लेकिन अप्रेल माह का वेतन मांगा और कहा कि जब तक वेतन नहीं दिया जाता वे, काम नहीं करेंगे।