नगरीय क्षेत्र
में संचालित ढाई दर्जन से अधिक
निजी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें
और यूनीफार्म एक ही दुकान पर
मिलने से अभिभावकों की न केवल
परेशानी बढ़ गई है बल्कि इन्हें
मनमाने दाम चुकाने को मजबूर
होना पड़ रहा है जबकि नियमानुसार
किसी भी प्राइवेट स्कूल की
पाठ््य पुस्तकें और यूनीफार्म
कम से कम तीन दुकानों पर मिलना
चाहिए।
जानकारी
के मुताबिक नगर में दो दर्जन
से अधिक प्राइवेट प्राइमरी
एवं मिडिल स्कूल हैं। इनमें
से अधिकांश की पाठ््य पुस्तकें
और यूनीफार्म एक ही दुकान पर
मिल रही है। इस प्रकार की स्थिति
पुस्तक विक्रेता और स्कूल
संचालकों की साठगांठ के चलते
बनी हुईहै। इससे बड़ा सांठगांठ
का नमूना और क्या हो सकता है।
अभिभावकों की मजबूरी यह है
कि सरकारी स्कूलों मेें पढ़ाई
लिखाई ठीक प्रकार से होती नहीं
है ऐेसे में लोग अपने बच्चों
को बेहतर शिक्षा की गरज से
प्राइवेटस्कूलों में भर्ती
कराते हैं इसके साथ ही प्राइवेट
स्कूल संचालकों की मनमानी
झेलने को मजबूर होना पड़ता
है। इस प्रकार की स्थिति प्राय
प्रतिवर्ष
बनती है लेकिन प्रशासन इस दिशा
में ऐसी पहल नहीं कर सका है
जिससे अभिभावकों को राहत मिल
सके। जब प्रदर्शन होते हैं
तो टीम गठित होती है जांच करती
है तब तक कमाई और कमीशन का खेल
हो चुका होता है। अभिभावकों
का कहना है कि अगर प्रशासन के
अधिकारी ध्यान दें तो इस मनमानी
प्रक्रिया पर अंकुश लग सकता
है।
मान्यता
समाप्ति की कार्रवाई होगी
पाठ््य
पुस्तक और यूनीफार्म को लेकर
साठगांठ की गई है तो इसकी जांच
की जाएगी और सत्यता पाए जाने
पर संबंधित स्कूलों की मान्यता
समाप्ति की कार्रवाईप्रस्तावित
की जाएगी।
कार्रवाई
होगी
प्राइवेटस्कूलों
में पाठ्य पुस्तक और यूनीफार्म
को लेकर क्या मापदंड हैं इस
बारे में जिला शिक्षा अधिकारी
से चर्चा की जाएगी और जांच
कराकर कार्रवाई का निर्धारण
किया जाएगा।