भिवाड़ी. बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की दर्जनों फाइल दबाने और जानकारी नहीं देने पर पत्रिका ने छठवें दिन पड़ताल की। जमीन जायदाद की खरीद-बिक्री करने वाले जानकारों से बातचीत की, जिसमें निकलकर सामने आया कि 90ए की फाइल दबाने के पीछे एक सोची-समझी रणनीति है। जिम्मेदार अधिकारियों को डर था कि 90ए में जो […]
भिवाड़ी. बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की दर्जनों फाइल दबाने और जानकारी नहीं देने पर पत्रिका ने छठवें दिन पड़ताल की। जमीन जायदाद की खरीद-बिक्री करने वाले जानकारों से बातचीत की, जिसमें निकलकर सामने आया कि 90ए की फाइल दबाने के पीछे एक सोची-समझी रणनीति है। जिम्मेदार अधिकारियों को डर था कि 90ए में जो भी काला-पीला किया है, इसकी गुत्थी खुलकर आमजन और सरकार के सामने अगर आ गई तो मामला उलझ जाएगा। जितना सब कुछ छिपाकर किया है, वह उजागर होने पर सभी को खेल समझ आ जाएगा। बिना सडक़ 90ए करने और 90ए करने के बाद पत्रावली को निरस्त करने के मामले सामने आ चुके हैं, इससे यह साबित हो चुका है कि गड़बड़ हुई है, जिसे छिपाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पूरा नेटवर्क किया विकसित
90ए की फाइल दबाने के साथ अधिकारियों ने माफिया का नेटवर्क विकसित कर लिया है। माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है। कृषि भूमि को खरीदकर बेचान करना हो या भूरूपांतरण कराने के मामले में अधिकारियों की हिस्सेदारी के मामले समाने आ रहे हैं। अधिकारियों का पेट एक-दो करोड़ के छोटे भूखंड से भरने वाला नहीं है। मामला बड़े स्तर पर चल रहा है, जिसमें एक साथ एकड़ और हेक्टेयर में सौदे कर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। लंबे समय तक पदों पर रहते हुए जो नेटवर्क तैयार किया, उसका परिणाम अब मोटे मुनाफे के तौर पर सामने आ रहा है। तभी एक बार विदाई होने पर कुर्सी नहीं छोड़ी। कुर्सी छोडऩे पर तंत्र के बिगडऩे का खतरा सताने लगा था। तंत्र में शामिल माफियाओं ने भी जोर लगाया कि साहब को हर हाल में रोकना होगा, अगले साहब के आने पर उन्हें गणित समझाना पड़ेगा, इसके बाद भी मामला फिट बैठे या नहीं।
इस तरह छिपाकर खरीद-बेच रहे जमीन
आसपास के क्षेत्र में जमीनों के भाव आसमान छू रहे हैं, जिस जमीन को खरीदो उसके ही भाव कुछ महीने में दोगुने हो रहे हैं। जिसका फायदा उठाने से अधिकारी भी नहीं चूक रहे। इसलिए मामले को तकनीकि रूप से हल किया जा रहा है। पहला तो यह है कि अपने नाम कराने में मामला उजागर होगा, दूसरा स्टांप ड्यूटी का पैसा लगेगा। इस तरह जमीन खरीदने के बाद जीपीए कराकर सीधे जमीन बेचने से लेकर भूखंड बेच दिए जाते हैं। काम नेटवर्क में शामिल लोग करते हैं, साहब के पास माल पहुंच जाता है।