
भोपाल@देवेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट...
महापौर, एमआईसी से पूछे बगैर संपत्तिकर व इससे जुड़े टैक्स में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव बना दिया है। हाल ही में बजट पर चर्चा के लिए हुई एमआईसी में इसे मंजूरी के लिए भी रखा गया। टैक्स बढ़ोतरी के प्रस्ताव से सब हैरान रह गए। इसे फिलहाल सूची से अलग कर दिया है। यह प्रस्ताव अपर आयुक्त वित्त की ओर से आया था।
स्पष्ट किया था कि संपत्तिकर और इससे जुड़े कर में दस फीसदी तक की बढ़ोतरी अगले बजट में प्रस्तावित की जाए। इस बढ़ोतरी से निगम की आय में करीब 20 करोड़ रुपए सालाना बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था। यदि यह प्रस्ताव बजट में शामिल होता है और इसे मंजूरी मिलती है तो शहरवासियों की जेब पर 20 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा। हालांकि चुनावी साल होने से टैक्स बढ़ोतरी के इस अफसरी प्रस्ताव से एमआईसी सदस्य नाखुश हंै। कुछ ने तो इसका अंदरूनी विरोध भी किया है।
एेसे समझंे कहां पड़ेगा असर
निगम ने परिक्षेत्र नंबर एक में आवासीय उपयोग के निर्माण का वार्षिक भाड़ा 154 रुपए प्रतिवर्गमीटर तय कर रखा है। यहां किसी का ५०० वर्गमीटर का आवासीय भवन है, तो वार्षिक भाड़ा मूल्य77000 रुपए बनता है। संपत्तिकर इसका दस प्रतिशत वसूला जाएगा। यानि 7700 रुपए बनेगा। यदि दस फीसदी की बढ़ोतरी हुई तो संपत्तिकर में सीधे तौर पर एक हजार रुपए की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे जुड़े अन्य करों में बढ़ोतरी पर500 वर्गमीटर के आवासीय निर्माण वाले की जेब पर 1200 से 1500 रुपए तक का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
निगम के ये हैं तय चार्ज
संपत्तिकर के लिए नगर निगम संबंधित क्षेत्र का वार्षिक भाड़ा मूल्य तय करता है। ये प्रतिवर्ग मीटर के अनुसार होता है और इसके आधार पर ही आवासीय, व्यवसायिक, औद्योगिक उपयोग का संपत्तिकर तय किया जाता है। वार्षिक भाड़ा मूल्य के लिए शहर में सात परिक्षेत्र तय किए हुए हैं।
- अनिवार्य समेकितकर 250 रु. तय है।
- समेकितकर संपत्तिकर का 20फीसदी बनता है।
- संपत्तिकर का 20 प्रतिशत जलअभिकर लिया जाता है।
- संपत्तिकर का 3 फीसदी शिक्षा उपकरण लिया जाता है।
- संपत्तिकर का एक से दो फीसदी तक नगरीय विकास उपकर लिया जाता है।
(नोट- इसके अलावा यूजर चार्ज अलग होता है। ये आवासीय पर 30 रुपए प्रतिमाह और व्यवसायिक के लिए60 रुपए प्रतिमाह है।)
किसी भी तरह का प्रस्ताव विभाग के एमआईसी और महापौर की सहमति के बिना बनना ही नहीं चाहिए। टैक्स बढ़ोतरी का प्रस्ताव तो बेहद गंभीर है।
- शंकर मकोरिया, एमआईसी
जब तक किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती, उससे जनता को कोई नुकसान नहीं होगा। इसमें जनता के हितों का पूरा ध्यान रखेंगे।
- आलोक शर्मा, महापौर
इस प्रस्ताव को एमआईसी के लिए बनाने वाले अपर आयुक्त वित्त पीके श्रीवास्तव से जब पूछा गया कि आखिर ये प्रस्ताव क्यों बनाया, तो उन्होंने जवाब देने से ही इंकार कर दिया।