भोपाल

जिन्होंने गैस त्रासदी देखी भी नहीं वे भी झेल रहे दर्द

- दूसरी और तीसरी पीढ़ी में लक्षण, मानसिक रूप से विकलांग हुए कई बच्चे

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Nov 30, 2019
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भोपाल। दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी में से एक भोपाल गैस कांड में हजारों लोग की मौत हो गई और लाखों प्रभावित हैं। 2 और 3 दिसम्बर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से निकली जहरीली गैस ने पूरे शहर को अपने आगोश में ले लिया।

इस त्रासदी को झेलने वाले तो ये दर्द सह ही रहे हैं इसके अलावा 34 साल पहले हुए हादसे का असर दूसरी से तीसरी पीढ़ी में भी पहुंच रहा है। गैस कांड के बाद जो बच्चे पैदा हुए जो मानसिक रूप से अविकसित थे। ये मामले अब भी सामने आ रहे हैं। ऐसे बच्चों की संख्या हजारों में जा पहुंची है।

नौ साल की बेटी, खाना भी नहीं खा पाती अपने हाथों से

9 साल की फातिमा न तो चल पाती है और न ही ठीक से बोल और सुन पाती है। स्थिति ये है कि खुद अपने हाथों से खाना भी नहीं खा पाती। सारे काम इनकी मां फरहीन करती है। फातिमा मानसिक रूप से कमजोर है। जिस वजह से शरीर के कई हिस्से काम नहीं कर पाते। इनकी मां फरहीन गैस त्रासदी के एक साल बाद पैदा हुई। जबकि पिता इलियास उस दौरान दो साल के थे।

जहरीली गैस का असर इतना हुआ कि दूसरी पीढ़ी में बच्ची की मां फरहीन को अपनी गिरफ्त में लिया और 9 साल पहले तीसरी पीढ़ी में फातिमा पर भयानक असर डाला। बच्ची की हालत बताते हुए फरहीन ने कहा उनके पिता गैस पीडि़त थे। जहां शादी हुई वहां भी सभी गैस त्रासदी का दर्द झेल रहे हैं।

इन्होंने बताया भाई के बेटे को भी विकलांगता है। वे भी गैस पीडि़त हैं। इसके अलावा परिवार में कुछ और बच्चे हैं जो मानसिक विकलांगता का शिकार है। गैस त्रासदी में जो जहरीली गैस निकली उसके असर को कारण बताया जा रहा है।

Updated on:
30 Nov 2019 12:50 pm
Published on:
30 Nov 2019 09:03 am