
New Rail Line: एमपी का इंदौर शहर जो अपनी स्वच्छता और अदभुत नागरिक प्रबंधन के लिए देश का रोल मॉडल रहा है, अब परिवहन और शहरी गतिशीलता के क्षेत्र में ऐतिहासिक क्रांति की ओर बढ़ रहा है। 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप, शहर आगामी दो दशकों में एक आधुनिक, तेज, सुरक्षित और पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन तंत्र विकसित करने के मिशन पर है।
भविष्य का यह इंदौर केवल सड़कों को चौड़ा करने या वाहनों की संख्या बढ़ाने पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित एक एकीकृत परिवहन नेटवर्क तैयार करना है जिससे शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक की यात्रा सुगम, समय की बचत करने वाली और पर्यावरण के अनुकूल बनेगी। यहां पर नई रेल लाइन से ये शहर दूसरों से कनेक्ट होगा साथ ही स्मार्ट सिटी के रूप में स्थापित होगा।
वर्तमान में इंदौर जंक्शन एक तरह से डेड एंड स्टेशन की स्थिति में है, जहां अधिकांश ट्रेनें आकर समाप्त होती हैं। विजन 2047 तक रेलवे का पूरा भूगोल बदलने की तैयारी है। इंदौर से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, नागपुर और पटना जैसे शहरों के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं, लेकिन पूर्वी और दक्षिणी भारत से सीधा संपर्क अभी भी पर्याप्त नहीं माना जाता।
बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार और यात्रियों की संख्या के मुकाबले रेलवे नेटवर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता है। इसी को देखते हुए रेलवे ने इंदौर को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कई परियोजनाओं पर काम शुरू किया है।
लंबाई: 205 किलोमीटर
फायदा : इंदौर और जबलपुर के बीच दूरी में 68 से 150 किलोमीटर तक कम होगी। यात्रियों का लगभग एक घंटे तक समय बचेगा। दिल्ली, प्रयागराज, वाराणसी और पूर्वी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों को नया और छोटा मार्ग मिलेगा।
खासियत : इस परियोजना में करीब 8.64 किलोमीटर लंबी आधुनिक रेल सुरंग बनाई जा रही है जो मध्य प्रदेश की सबसे लंबी रेलवे टनल होगी।
लंबाई: लगभग 205 किलोमीटर
फायदा: झाबुआ, अलीराजपुर सहित कई क्षेत्रों को पहली बार सीधा रेल संपर्क मिलेगा। गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी। यात्री और माल परिवहन दोनों को गति मिलेगी।
वर्तमान स्थिति : परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। टीही सहित कई सुरंगों और पुलों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच रहा है।
लंबाई : 309 किलोमीटर
फायदा: इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ेगी। इंदौर और मुंबई के बीच रेल दूरी लगभग 200 किलोमीटर कम होगी। सफर में करीब साढ़े चार घंटे की बचत होगी। कंटेनर और औद्योगिक माल परिवहन की लागत घटेगी। यह लाइन पीथमपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी बड़ी राहत साबित होगी।
वर्तमान स्थिति : महाराष्ट्र में काम चल रहा है। मप्र के हिस्से में जमीन अधिग्रहण चल रहा है।
लंबाई: लगभग 142 किलोमीटर।
फायदा: पुरानी मीटर गेज लाइन को ब्रॉडगेज में बदला जा रहा है। इंदौर की दक्षिण भारत से सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। डेड एंड स्टेशन की स्थिति समाप्त होगी। लंबी दूरी की एक्सप्रेस और मालगाड़ियां आसानी से संचालित हो सकेंगी।
वर्तमान स्थिति : वन विभाग पेड़ काटकर रेलवे को जमीन हैंडओवर करने वाला है।