भोपाल

-40 परसेंटाइल वाले को भी मिला भी मिला मेडिकल कॉलेज से पीजी करने का मौका

दो दिन अतिरिक्त काउंसलिंग के बाद भी 49 सीट रह गईं खाली, हर साल 175 सीट तक रहती थी खाली

3 min read
Oct 27, 2023
,,

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में नॉन क्लिनिकल सीट भरने के लिए केंद्र सरकार ने जीरो परसेंटाइल वालों को एडमिशन देने की नई नीति बनाई थी। नई नीति के बाद भी पीजी की 49 सीट खाली रह गई। सबसे अंतिम एडमिशन -40 परसेंटाइल लाने वाले को मिला है। इतनी सीट भरने के लिए भी चिकित्सा विभाग को काउंसिलिंग की तारीख तय समय से दो दिन अतिरिक्त करना पड़ी।

सिर्फ 7 डॉक्टर्स ने नॉन क्लिनिकल सीट में एडमिशन लिया

सीएलसी राउंड के बाद 98 सीट खाली रह गई थीं। इसके बाद फिर काउंसिलिंग हुई तो 42 सीट ही भर पाईं। इसके बाद विभाग ने 23 अक्टूबर को खत्म होने वाली काउंसिलिंग को दो दिन बढ़ाकर 25 अक्टूबर तक कर दिया। अंतिम दो दिनों में सिर्फ 7 डॉक्टर्स ने नॉन क्लिनिकल सीट में एडमिशन लेने में दिलचस्पी दिखाई। जीरो परसेंटाइल से नीचे के विद्यार्थियों को सिलसिला शुरू हुआ तो ये -40 परसेंटाइल तक पहुंच गया। 10 दिनों के प्रयास के बाद भी सिर्फ 49 सीटों पर ही एडमिशन हो पाए। इस बार काउंसलिंग में सरकारी कॉलेज की संख्या 11 है और इनमें कुल पीजी सीटों की संख्या 629 है। इसमें ओपन कैटेगरी की सीटें 418 हैं। शेष सीटें आरक्षित क्षेणी में हैं। वहीं निजी कॉलेजों की संख्या 8 है। जिनमें कुल पीजी सीटों की संख्या 830 है। निजी कॉलेजों में एनआरआई कोटा की 125 सीटें हैं।

पहले 175 तक सीट खाली रह जाती थीं
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों के बाद भले ही 49 सीट खाली रह गईं हों, लेकिन ये पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी कम है। पहले करीब 150 से 175 सीट तक खाली रह जाती थी। नॉन क्लिनिकल में नियमों में बदलाव के बाद पहली बार इतनी अधिक संख्या में सीट भर पाई हैं। स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक प्रदेश के निजी व शासकीय कॉलेजों में 137 सीट खाली रह गई थी।

दो साल पहले भी किया गया था बदलाव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से क्वॉलिफाइंग पर्सेंटाइल और कटऑफ फॉर्मूले को कम करने की मांग की थी। 20 सितंबर को मंत्रालय ने आदेश जारी कर जीरो पर्सेंटाइल का जिक्र कर दिया गया। मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों पर एडमिशन के लिए केंद्र सरकार ने मॉप-अप राउंड में कट ऑफ मार्क्स जीरो कर दिया है। यह पहला मौका था जब मेडिकल काउंसलिंग में सभी श्रेणी में जीरो कट ऑफ किया गया। इस आदेश के बाद परीक्षा में बैठने वाले सभी छात्र एडमिशन प्रक्रिया हिस्सा लेने के लिए पात्र हो गए। दो साल पहले भी केंद्र सराकर ने पीजी की सीट्स भरने के लिए नियमों में बदलाव किया था। तब कट ऑफ को करीब 15 फीसदी तक कम किया गया था। तब जनरल कट ऑफ को 302 से घटाकर 247 कर दिया गया था।

क्लिनिकल ब्रांच में प्रैक्टिस में भी अधिक मौके

मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय का कहना है कि पीजी स्ट्रीम में क्लिनिकल ब्रांच में स्कोप अधिक होता है। इसमें प्रैक्टिस में भी अधिक मौके होते हैं। इसी वजह से मेडिकल स्टूडेंट्स के बीच इनकी ही डिमांड अधिक होती है। वहीं, नॉन क्लिनिकल ब्रांच में अपेक्षाकृत कम होते है। शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेज दोनों जगह वैकेंसी कम होती है, प्राइवेट प्रैक्टिस में भी अधिक संभावनाएं नहीं है।

निजी मेडिकल कॉलेजों में इतनी ज्यादा फीस भरकर पढ़ाने करने की बजाए स्टूडेंट्स इन ब्रांच का चुनाव करने की बजाए ड्रॉप लेकर पीजी की फिर से तैयारी करने या नौकरी करने पर जोर देते हैं। इससे फिजियोलॉजी, एनाटॉमी, फॉरेंसिक मेडिसिन जैसी नॉन क्लीनिकल सब्जेक्टस की सीटें खाली रह जातीं हैं। हालांकि, इतने कम अंक वाले को एडमिशन मिलने से स्पेशलिस्ट की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। डीएमई डॉ. एके श्रीवास्तव का कहना है कि पीजी की सीटों को भरने के लिए काउंसिलिंग को दो दिन के लिए आगे बढ़ाया गया था। दो दिन में 7 नॉन क्लिनिकल सीटों में एडमिशन हुए हैं, 49 सीटें अभी भी खाली है। पहले 150 से 175 सीटें तक नॉन क्लिनिकल में खाली रह जाती थीं।

Published on:
27 Oct 2023 10:09 pm
Also Read
View All