भोपाल

गोदामों में है 52 लाख टन गेहूं, अब धान रखने का संकट

- एफसीआई ने गेहूं बेचने 27 बार किए आवेदन, पर नहीं बिका
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Dec 04, 2019
warehouses
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अशोक गौतम, भोपाल. प्रदेश के गोदाम अनाजों से भरे पड़े हैं। इनमें रखा गेहूं बेचने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 27 बार टेंडर जारी किए। लेकिन, खरीदार नहीं मिला। अब एफसीआई ने रेट रिवाइज कर 2190 के बजाय 1800 रुपए प्रति क्विंटल का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इस साल प्रदेश से मात्र सात लाख टन गेहूं उठाया है। जबकि उसे करीब 52 लाख टन गेहूं उठाना था। अब प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू हो गई है। गोदामों में जगह न होने से धान खुले में रखना होगा।
प्रदेश के गोदामों की क्षमता 120 लाख टन है। इनमें करीब 100 लाख टन गेहूं, चना, सरसों, मसूर, धान और चावल दस माह से रखा हुआ है। 79 लाख टन तो गेहंू ही है। इसमें से 27 लाख टन गेहूं पीडीएस के तहत बांटा जाना है। जबकि केंद्रीय पूल का 52 लाख टन गेहूं प्रदेश के गोदामों में है। इतना ही नहीं गेहूं का करीब आठ माह का किराया 361 करोड़ रुपए भी एफसीआई ने मप्र भंडार निगम को नहीं दिया है।

- खुले कैप में रखा जाएगा धान
इस वर्ष 22 लाख टन धान खरीदी का अनुमान है। धान रखने के लिए बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, कटनी, सीधी, उमरिया और शहडोल सहित करीब 10 जिलों को खुले कैप बनाने के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि धान को खुले में रखना अच्छा नहीं है। क्योंकि उसमें ज्यादा धूप लगाने से मिलिंग में चावल की टूटन बढ़ती है। लेकिन सरकार के पास भंडारण का विकल्प नहीं है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने गेहूं उठाने के लिए एक बार फिर केंद्र में अर्जी लगाई है।


- गेहूं भंडारण की भी होगी दिक्कत
एफसीआई यदि केंद्रीय पूल के अनाज का उठाव दो माह के अंदर नहीं करता है तो प्रदेश में गेहूं के भंडारण की भी दिक्कत होगी। इस रबी सीजन में बोवनी के पहले कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश में 80 लाख टन गेहूं उत्पादन होने का अनुमान लगाया है। पिछले साल का ही करीब 7 लाख टन अनाज खुले कैप में रखा हुआ है।

पहले प्रतिमाह केंद्रीय पूल का एक लाख मीट्रिक टन गेहूं उठाया जाता था। अब तीन लाख मीट्रिक टन उठाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। गेहूं खुले बाजार में बेचने के भी प्रयास किए रहे हंै।
- अभिषेक यादव, महाप्रबंधक, एफसीआई

केंद्र द्वारा गेहूं का उठाव नहीं करने से अब धान और गेहूं के भंडारण की दिक्कत होगी। इससे केंद्र में हमारा पैसा भी रुका हुआ है। उधर, हमें बैंकों में करोड़ों रुपए का ब्याज भरना पड़ रहा है। केंद्र सरकार को इससे अवगत करा दिया गया है।
- अभिजीत अग्रवाल, एमडी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम

Published on:
04 Dec 2019 05:34 am