
Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में एक बार फिर हरियाली पर खतरा मंडरा रहा है। इस बार शिवाजी नगर से चार इमली तक 500 एकड़ में तीनों मेन रोड के पास के क्षेत्रों के 60 हजार पेड़ संकट में है। शिवाजी नगर, तुलसी नगर, 74 बंगला, चार इमली तक के क्षेत्रों का री-डॅसिफिकेशन का निर्णय सोमवार को यानि आज राज्य स्तरीय साधिकार समिति में लिया जाएगा। मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 में भी इसे शामिल किया गया है। यहां से मंजूरी मिलती है तो फिर शहर के इस सबसे बड़े ग्रीन एरिया में 50 साल से अधिक पुराने पेड़ संकटग्रस्त होंगे। यहां हरियाली की कब्रगाह वाली स्थिति नजर आ सकती है।
टीटी नगर के बनने के शुरुआत से ही मौजूद मेन रोड 1, मेन रोड 2 और मेन रोड 3 का सडक़ नेटवर्क तय किया था। एमपी नगर से अरेरा कॉलोनी, हबीबगंज तक का क्षेत्र न्यू मार्केट टीटी नगर को जोड़ता है। इनके किनारे सरकारी आवास विकसित हुए। बढ़ती हरियाली ने इस क्षेत्र को शहर का सबसे बड़ा ग्रीन एरिया बना दिया। इसके किनारे चिनार पार्क, एकांत पार्क, गुलाब उद्यान समेत करीब 12 पार्क है। सडक़ों के बीच में हरियाली व आवासीय क्षेत्र विकसित हुआ। यदि यहां हाइराइज निर्माण हुआ और पेड़ काटे गए थे तो खत्म होने वाली हरियाली को री-स्टोर करने 70 साल लगेगा। अभी टीटी नगर में काटे गए छह हजार पेड़ों की भरपाई नहीं हो पाई है।
टाउन प्लानर शीतल शर्मा का कहना है। जब शहर के कोर एरिया में 75 मीटर चौड़ाई व 52 किमी लंबाई का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित करके आरजी चार लैंडयूज के तहत यहां मनमर्जी की ऊंचाई वाला निर्माण करने की छूट है तो यहां हाइराइज बिल्डिंग बनाने की बजाय शहर के बीच हरियाली खत्म करने से क्या लाभहै? शहर के भीतर मेन रोड्स के आसपास री-डेंसिफिकेशन से हाइराइज डेवलपमेंट किया गया तो फिर ग्रोथ कॉरीडोर किनारे तय प्रोजेक्ट्स की सेल पर असर होगा।
इससे रियल एस्टेट मार्केट को परेशानी होगी। एक्सपर्ट के अनुसार स्वामी दयानंद नगर, तुलसी नगर और शिवाजी नगर के इस पूरे क्षेत्र को यहां की इमारतों सहित एक ग्रीन एरिया में बदल दिया जाए और यहां किसी भीनए निर्माण की अनुमति न दी जाए। जर्जर इमारतों को गिराकर नए पौधे लगाए जाने चाहिए, ताकि यह क्षेत्र स्मार्ट सिटी और व्यावसायिक केंद्र महाराणा प्रताप नगर के बीच एक ग्रीन बफर के रूप में काम कर सके।
साल 2015-16 में भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तुलसी नगर और शिवाजी नगर के पेड़ों को काटने के प्रस्ताव का भारी विरोध हुआ था, जिसके बाद इसे निरस्त करना पड़ा था। अब फिर से उसी तरह की योजना लाने से भोपाल की जलवायु, तापमान और शुद्ध हवा पर विनाशकारी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल टीटी नगर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बाद अब शिवाजी नगर और तुलसी नगर क्षेत्र की 350 एकड़ जमीन पर नजर है। शिवाजी नगर एवं तुलसी नगर में सरकारी कर्मचारियों के क्वार्टर वर्ष 1966 में बनाए गए थे। जब देश भर से लोग यहाँ आए, तो वे अपने मूल स्थानों के पौधे यहाँ ले आए। यही कारण है कि इस क्षेत्र में कॉस्मोपॉलिटन वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। ये शहर के सबसे इको-फ्रेंडली इलाकों में से हैं।
टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार शहर के चारों तरफ निर्माण के लिए पेड़ों को काटा गया। शिवाजी नगर, तुलसी नगर, 74 बंगला, चार इमली की हरियाली शहर का हृदय स्थल है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। यहां अलग से नियम तय हो, जिसमें तीन से चार मजिल से अधिक की कोई भी इमारत नहीं बनना चाहिए। 30 फीट तक ऊंचे पुराने पेड़ इन इमारतों के नीचे दबेंगे नहीं। पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी पांडेय का कहना है कि ये मुख्यमार्ग की हरियाली शहर के भीतर ग्रीन कॉरिडोर की तरह है जिसका कोई पर्यावरणीय विकल्प नहीं हैं। कहीं भी पौधों को एक शहरी जंगल की तरह विकसित होने में 70 साल लग जाते हैं।