भोपाल

पटवा के खिलाफ हो गए थे 71 विधायक

पटवा के खिलाफ हो गए थे 71 विधायक
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Updated: 3 Sep 2018, 9:58 AM IST
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पटवा के खिलाफ हो गए थे 71 विधायक

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा अपने सख्त मिजाज के कारण विरोधियों के बीच बहुत अलोकप्रिय थे। जिस समय पटवा सरकार थी, उस समय आर्गेनाइजर के एक लेख ने अन्य भाजपा नेताओं को अपनी सरकार के मुखिया की खुली आलोचना का अवसर दे दिया।
नेता खुलकर पटवा की आलोचना करने लगे। नतीजा यह हुआ कि पटवा की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने के लिए एक समिति बनाई गई। यह समिति हर 15 दिन में समीक्षा करती थी। समिति की अध्यक्ष राजमाता सिंधिया को बनाया गया। उस दौरान 71 विधायकों ने हस्ताक्षर कर पटवा के खिलाफ विरोध जताया था।

कुशाभाऊ को हटाना पड़ा था
गुटबाजी के कारण पार्टी को प्रदेश संगठन से कैलाश जोशी और कुशाभाऊ ठाकरे को हटा दिया था। जोशी को राष्ट्रीय स्तर पर किसान मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया। ठाकरे को दिल्ली ले जाया गया। प्यारेलाल खंडेलवाल को हरियाणा भेज दिया गया। इन सब की जगह सुंदर सिंह भंडारी को मध्यप्रदेश का प्रभार दिया गया।

गुटबाजी के चलते दिल्ली भेजे गए ठाकरे
दीपक तिवारी के मुताबिक प्यारेलाल खंडेलवाल ने मंत्री बनने से इनकार कर दिया था। उनका मानना था कि युवा विधायकों को सत्ता से दूर रहना चाहिए। मंत्रीमंडल के दूसरे विस्तार में पटवा ने गोविंद सारंग की सिफारिश पर छत्तीसगढ़ इलाके के प्रेमप्रकाश पांडे और बृजमोहन अग्रवाल को राज्यमंत्री बना दिया।

गुटों में बंटी थी पार्टी
प्रदेश की सियासत के परतें खोलती किताब राजनीतिनामा के लेखक दीपक तिवारी कहते हैं कि उस समय भाजपा में भारी गुटबाजी शुरू हो गई थी। भाजपा नेता सिकंदर बख्त ने तो यहां तक कह दिया था कि पटवा को शासन कला नहीं आती। भैरूलाल पाटीदार पंचायत मंत्री थे। उनके विरोध में इंदौर भाजपा जिला उपाध्यक्ष और महू शहर अध्यक्ष अपने कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी छोड़कर चले गए। 1990 की भाजपा सरकार के दौरान पटवा के अधिनायकवादी रवैये के खिलाफ 1992 में उनकी ही पार्टी के 71 विधायकों ने हस्ताक्षर कर विरोध जताया।

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