स्पेशल ओलंपिक के वल्र्ड समर गेम्स -2019 में प्रदेश के चार स्पेशल चाइल्ड भोपाल की श्रुति और मनिमेगलई साइकिलिंग में दिखाएंगी अपना हुनर
भोपाल . हर इंसान की कोई न कोई कमजोरी जरूर होती है। हर व्यक्ति खुद की कुछ कमजोरियों के कारण जिंदगीभर इनसे जूझता रहता है और इनके कारण कई असफलताओं का सामना करना है लेकिन कई लोग इसे अपनी ताकत बनाकर नया इतिहास रच देते हैं।
कुछ ऐसा ही करने जा रहे हैं प्रदेश के चार मंदमुद्धि खिलाड़ी। प्रीति चौधरी, मनी मेघलाई, श्रुति और जॉय एडविन का सलेक्शन 14 से 21 मार्च 2019 में अबू धाबी के दुबई में होने वाले स्पेशल ओलंपिक समर गेम्स के लिए भारतीय टीम में किया गया है। जहां प्रीति चौधरी एथलेटिक्स, मनी मेघलाई व श्रुति साइकिलिंग और जॉय एडविन पावर लिफ्टिंग में दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लौहा मनवाएंगे। आइऐ हम बताते हैं इन खिलाडिय़ों की सक्सेस स्टोरी।
पहले नेशनल में जीता था गोल्ड
शहर के एसओएस बाल ग्राम की मंद बुद्धि खिलाड़ी 17 वर्षीय मनिमेगलई यहां आठ वर्ष की उम्र से रह रही है। इस दौरान उसने विशेष प्रशिक्षण हासिल कर 16 साल की उम्र से साइकिलिंग में चमक रही है। 2016 में स्टेट लेवल की साइकिल रेस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद 2017 में हुई नेशनल साइकिलिंग चैंपियनशिप में दो किमी की रेस में गोल्ड और तीन किमी की रेस में सिल्वर मेडल जीता। इस प्रदर्शन के आधार पर मनी का चयन अबूधाबी में होने वाले स्पेशल समर ओलंपिक के भारतीय साइकिलिंग टीम में किया गया।
श्रुति है आशा की किरण
19 वर्षीय श्रुति 10 वर्ष की आयु से एसओएस बालग्राम में रहती है। इस दौरान यहां विशेष प्रशिक्षण हासिल किया और साइकिलिंग के अलावा फुटसाल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 2015 में हुई नेशनल फ्लोबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया।
इसी साल खेली गई नेशनल फ्लोरहॉकी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 2016 में अबू धाबी में खेली गई इंटरनेशनल फ्लोरहॉकी चैंपियनशिप में भागीदारी की, जबकि 2017 में नेशनल साइकिल रेस प्रतियोगिता की दो किमी और पांच किमी रेस में गोल्ड मेडल हासिल किया।
पावरलिफ्टिंग में जॉय का दम
34 वर्षीय पावरलिफ्टर जॉय एडमिन में जन्म से विकलांगता के लक्षण नजर आने लगे थे। जॉय के पैरेंट्स उसे डॉक्टर के पास ले गए। जांच में पता चला कि जॉय मानसिक रूप से कमजोर है और उसका आईक्यू औसत 80 प्रतिशत है।
डॉक्टर ने सलाह दी कि मानसिक मंदता के कारण वह सामान्य बालकों से अलग है इसका मानसिक विकास धीरे-धीरे होगा। जॉय को विकलांग सेवा भारती स्पेशल स्कूल में एडमिशन कराया। परीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि यह खेलकूद में अच्छा भविष्य बना सकता है। काफी प्रतिभा है।
फिर उन्होंने विकलांग सेवा भारती के खेल विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण हासिल किया। इसके बाद स्पेशल ओलंपिक भारत की डिस्ट्रिक्ट, स्टेट, नेशनल लेवल में पावरलिफ्टिंग में नाम रोशन किया।
पहली नेशनल मीट में जीता गोल्ड
16 वर्षीय प्रीति चौधरी के शरीर का विकास धीमा हुआ। पहले उसके पैरेंट्स उसे सामान्य बच्चों जैसे समझते थे लेकिन कुछ विसंगतियां दिखने पर वे प्रीति को डॉक्टर के पास ले गए, फिर मालूम चला कि उसमें मानसिक क्षमता कम है। पैरेंट्स ने उसका एडमिशन विकलांग सेवा संस्थान में कराया, जहंा कोच ने उसे एथलेटिक्स का प्रशिक्षण दिया। फिर जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। जयपुर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर की रेस में गोल्ड और 200 मीटर की रेस में सिल्वर मेडल जीता।