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एमपी बीजेपी में मलाईदार पदों के लिए बढ़ी खींचातानी, निगम-मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड और समितियां अटकीं

MP BJP- राजनीतिक नियुक्तियां: कुछ निगम मंडल, विकास प्राधिकरण को काफी मलाईदार माना जाता है, भोपाल में चेतन पर पेंच, इंदौर में हरिनारायण को रोकने दिल्ली में वीटो

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MP BJP- हरिचरण यादव, भोपाल. मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बीजेपी में अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है। इसके कारण 31 से ज्यादा निगम मंडलों, बोर्डों, आयोगों और विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियां अटक गई हैं। इनमें से कुछ निगम मंडल, विकास प्राधिकरण को काफी मलाईदार माना जाता रहा है। भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के लिए कई दावेदारों के बीच पूर्व से चल रहा चेतन सिंह का नाम फिलहाल अटक गया है। कुछ मंत्री और विधायक चाहते हैं कि इस पद पर उनके गुट के व्यक्ति की ताजपोशी हो, ताकि भविष्य में इसका फायदा अपने क्षेत्रों में अधोसंरचनात्मक विकास के रूप में लिया जा सके। उधर, इंदौर विकास प्राधिकरण में लंबे समय से चला आ रहा हरिनारायण यादव के नाम पर भी एकजुटता नहीं बन पा रही है। सूत्रों के मुताबिक यह नाम फाइनल होता, उसके पहले एक सक्रिय नेता ने दिल्ली जाकर वीटो लगा दिया है। जबकि अब तक हो चुकी नियुक्तियों में स्वयं को निराश पाने वाले 50 से ज्यादा नेताओं ने बचे निगम मंडलों, विकास प्राधिकरणों, आयोगों और बोर्डों में जगह पाने के लिए दिन-रात एक कर दिए हैं। इन सबके बीच सत्ता व संगठन राजनीतिक नियुक्तियों का क्रम जारी रखना चाहता है।

प्रदेश में अभी 31 पदों पर नियुक्तियां बाकी

नीति एवं योजना आयोग, सामान्य निर्धन कल्याण आयोग, पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग, गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, खनिज विकास निगम, पंजाबी साहित्य अकादमी, सिंधी साहित्य अकादमी, कौशल विकास एवं रोजगार बोर्ड, स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन, ऊर्जा विकास निगम, हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम, बीज एवं फार्म विकास निगम, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम, कृषि विपणन बोर्ड, पर्यटन बोर्ड, महिला वित्त एवं विकास निगम, राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम, माटीकला बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम, सफाई कर्मचारी आयोग, कृषक आयोग, वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग, शिल्फी मंडल, समाज कल्याण बोर्ड, असंगठित कामगार बोर्ड, मदरसा बोर्ड, भारिया विकास प्राधिकरण, कोल जनजाति विकास प्राधिरकण, कटनी विकास प्राधिकरण, महाकौशल विकास प्राधिकरण, बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में नियुक्तियां बाकी है।

जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

प्रदेश में हो रही राजनीतिक नियुक्तियों का जनता को कितना फायदा होगा, यह तो भविष्य में ही पता चल पाएगा, लेकिन आर्थिक रूप से सरकार पर बोझ आना शुरू हो गया है। अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के लिए कार्यालयों में जमावट, वाहनों का प्रबंध और कर्मचारियों की मांग बढऩे लगी है। एक पूर्व अध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक महीने में एक अध्यक्ष, उसके लिए वाहन, ड्राइवर, कार्यालय व स्टॉफ का खर्च मिलाकर 3 से 5 लाख रुपए खर्च होंगे। उक्त खर्च का कांटा शुरू हो चुका है।

इन्हें दोबारा मौका

अब तक हो चुकी राजनीतिक नियुक्तियों में कुछ लोग ऐसे भी है जो पूर्व में भी पद पा चुके थे। इस बार तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष बनाए गए विनोद गोटिया पूर्व में पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं। जबकि लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष बनाए गए सत्येंद्र भूषण सिंह पहले वन विकास निगम में अध्यक्ष रहे हैं। जबकि महेंद्र सिंह यादव बीज विकास निगम में रह चुके हैं, अब उन्हें अपेक्स बैंक का प्रशासक बनाया है।