Bhopal- राजस्व विभाग और जिला प्रशासन अब ऐसे खसरों को चिन्हित कर कार्यवाही कर रहा है।
Bhopal- एमपी की राजधानी में गजब कारस्तानी सामने आई है। यहां कई खेत गायब हो गए हैं। जहां फसल दिखाई देनी थी वहां कॉलोनियों बनीं हैं। भोपाल में बीते एक साल में जिले के हजारों कृषि भूमि खसरों से खेती गायब हो गई। यहां फसल की बजाय सीमेंट कांक्रीट के मकान दुकान बन गए। जिला प्रशासन की टीम जब वर्ष 2025-26 की गिरदावरी यानि खसरे के आधार पर फसल की जानकारी जुटाने निकली तो स्थिति सामने आई। खसरों की जमीन पर जो निर्माण हुए वे भी बिना अनुमति के किए गए हैं। यह स्थिति तब है जब भोपाल कलेक्टर द्वारा अवैध कॉलोनियां पर लगातार सख्ती की बात कही जा रही है। राजस्व विभाग और जिला प्रशासन अब ऐसे खसरों को चिन्हित कर कार्यवाही कर रहा है।
200 पटवारियों की रिपोर्ट में 2000 ऐसे खसरे मिले, खेती की बजाय कॉलोनियों की फसल लहलहा रही
जिले के करीब 200 पटवारियों की रिपोर्ट में 2000 ऐसे खसरे मिले, जिनके एक भाग से खेती की बजाय कॉलोनियों की
फसल लहलहा रही है। गौरतलब है कि मंगलवार को गिरदावरी की रिपोर्ट देने का अंतिम दिन था।
जिले की जमीन को 1.71 लाख खसरों में बांटा हुआ है। इसमें करीब सवा लाख खसरे कृषि भूमि के हैं। जिला प्रशासन
ने बीते कुछ सालों से खसरावार गिरदावरी शुरू की है। किस खसरे की कृषि भूमि पर किस तरह की फसल है, इससे ही जिले व राज्य को पता चलता है। इसके आधार पर ही रिपोर्ट बनाई जाती है कि जिले में कौन सी फसल का कितना रकबा है और कितनी पैदावार हुई है।
प्रशासन ने हुजूर में 139 अवैध कॉलोनियां चिन्हित कर रखी है। 70 से अधिक अवैध कॉलोनियां कोलार में, 50 से अधिक गोविंदपुरा नजूल में है। अब जो 2000 खसरों की जमीन पर निर्माण हुए वे भी बिना अनुमति के हैं। बता दें कि भोपाल में जिला प्रशासन द्वारा अवैध कॉलोनियां पर लगातार सख्ती की बात कही जा रही है। कुछ अवैध निर्माणों को ढहाया भी गया है। इसके बावजूद खेतों में फसल की जगह अवैध कॉलोनियां उग रहीं हैं।