भोपाल

कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत, PET-CT स्कैन सेवा से मिलेगी ‘स्टेज’ की सही जानकारी

Cancer Treatment: एम्स में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के तहत अत्याधुनिक जांच सुविधाएं बढ़ाने के क्रम में कैंसर जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण पेट-सीटी स्कैन सेवा जल्द शुरू की जाएगी।
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Updated: 20 Feb 2026, 5:15 PM IST
Cancer Treatment
Cancer Treatment (Photo Source- freepik)

PET-CT scan for Cancer Treatment: कैंसर की शुरुआती और सटीक पहचान अब और आसान होगी। अब एम्स भोपाल में जल्द पेट-सीटी स्कैन सेवा शुरू होने जा रही है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज की दिशा और तेज होगी और मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। एम्स में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के तहत अत्याधुनिक जांच सुविधाएं बढ़ाने के क्रम में कैंसर जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण पेट-सीटी स्कैन सेवा जल्द शुरू की जाएगी। इस जांच से कैंसर की सही स्थिति, फैलाव और इलाज की प्रभावशीलता का आकलन संभव होगा।

PET-CT स्कैन से कैंसर की सही स्टेज कैसे पता चलती है

पेट-सीटी स्कैन के माध्यम से पूरे शरीर में कैंसर कोशिकाओं की गतिविधि देखी जाती है। इलाज शुरू करने से पहले कैंसर के सही स्टेज का पता चलता है। इलाज के बाद यह भी पता चलता है कि उपचार कितना असरदार रहा। अब तक इस जांच के लिए मरीजों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। अब उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

AIIMS Bhopal में उपलब्ध अन्य न्यूक्लियर मेडिसिन जांच

एम्स भोपाल न्यूक्लियर मेडिसिन तकनीक से की पूरे शरीर की जांच करने वाला प्रदेश का एकलौता सरकारी संस्थान है। इस तकनीक से एम्स भोपाल में बोन स्कैन, कार्डियक स्कैन, रीनल स्कैन व थायरॉयड स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। हायपरथायरॉइडिज्म और थायरॉइड कैंसर के इलाज में भी यह तकनीक उपयोगी है। हड्डियों के कैंसर के दर्द से राहत देने में भी उपयोगी है। आयुष्मान धारक मरीजों को ये सेवाएं नि:शुल्क मिल रही हैं।

PET-CT स्कैन के मुख्य फायदे

  • यह परीक्षण शरीर की सामान्य और कैंसर कोशिकाओं में फर्क कर सकता है, जिससे शुरुआती चरणों में ही ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है।
  • पीईटी स्कैन से कैंसर कोशिकाएं की आक्रामकता और सीटी स्कैन से उनकी संरचना का पता चलता है, जिससे कैंसर शरीर में कितना फैला है (स्टेजिंग), यह स्पष्ट हो जाता है।
  • कैंसर के इलाज (कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी) के बाद यह जानने में मदद करता है कि उपचार कितना प्रभावी रहा है या ट्यूमर कम हुआ है या नहीं।
Updated on:
20 Feb 2026, 5:15 PM IST
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