
PhD thesis (Photo Source: AI Image)
UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पीएचडी शोधप्रबंधों को शोधगंगा रिपॉजिटरी में शत-प्रतिशत अपलोड करने की प्रक्रिया अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। इसके चलते हजारों थीसिस पारदर्शिता और सत्यापन के दायरे में मानी जा रही हैं। खासतौर से प्राइवेट यूनिवर्सिटी, जहां से हर साल करीब एक हजार छात्रों को पीएचडी अवॉर्ड की जाती है। इसमें से कितनी शोधगंगा पर अपलोड की जाती हैं। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
वहीं सरकारी यूनिवर्सिटी की भी शत-प्रतिशत थीसिस अपलोड नहीं हो पा रही हैं। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2009 के बाद बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी जमा लगभग 2,500 से अधिक पीएचडी थीसिस साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) जांच प्रक्रिया से गुजर चुकी हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि थीसिस को निर्धारित मानकों के अनुसार, जांच के बाद ही स्वीकार किया जाता है। इसके लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन सॉफ्टवेयर का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार प्लेजरिज्म सॉफ्टवेयर केवल यह स्पष्ट करता है कि शोधप्रबंध का कंटेंट कहीं से कॉपी तो नहीं किया गया है।
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मत है कि शोधार्थी की वास्तविक समझ शोध पर पकड़ का आकलन मुख्यत: वायवा (मौखिक परीक्षा) के दौरान ही हो पाता है। नौकरी या चयन प्रक्रियाओं में होने वाले इंटरव्यू अथवा विस्तृत अकादमिक मूल्यांकन में भी यह स्पष्ट हो सकता है कि शोध कार्य स्वयं किया गया है या नहीं। लेकिन तब तक शोधार्थी को पीएचडी की उपाधि दी जा चुकी होती है, जिससे बाद में जांच केवल औपचारिकता रह जाती है।
पीएचडी को लेकर 2022 रेग्युलेशन एक्ट आने के बाद सख्ती बढ़ी है। पीएचडी अब पहले की तरह आसन नहीं हैं। हालांकि प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर निगरानी रखने की जरूरत है। डॉ. एचएस त्रिपाठी, पूर्व रजिस्ट्रार, बीयू
सॉफ्टवेयर केवल यह स्पष्ट करता है कि शोध का कंटेंट कहीं से कॉपी तो नहीं किया गया है। हालांकि, तकनीक नहीं बता पाते शोधार्थी ने थीसिस स्वयं तैयार की है या किसी अन्य व्यक्ति से लिखवाई है। -डॉ. आनंद शर्मा, प्राध्यापक, एमवीएम
सूत्रों के अनुसार सरकारी विश्वविद्यालयों के सख्त नियम के चलते अब छात्र निजी विश्वविद्यालयों का रुख कर रहे हैं। वहां तीन से चार लाख में पीएचडी पूरी होती है। कई यूनिवर्सिटी में गाइड मोटी रकम लेकर खुद ही थीसिस और रिसर्च पेपर तैयार कर देते हैं।
Published on:
19 Feb 2026 10:54 am
