एक गांव ऐसा जहां के अधिकतर बुजुर्गों की उम्र है 100 के पार...
भोपाल@सुनील शर्मा की रिपोर्ट...
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर बसे सीहोर जिले में एक ऐसा गांव भी है, जहां रहने वाले बहुत से बुजुर्ग 100 साल की उम्र पार कर चुके हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं ढिंगाखेड़ी गांव की...
इस गांव की सबसे खास बात ये है कि यहां एक नहीं बल्कि कई लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 100 साल के ऊपर है। इन लोगों ने न केवल देश की पहली सरकार को बनते देखा है, बल्कि देश के अच्छे बुरे सभी हालातों को भी करीब से जाना है।
गांव के ही एससिंह जहां खुद को 102 साल का बताते हुए कहते हैं कि जब देश आजाद हुआ था, तब वह 31 साल के थे और देश में पहली बार हुए चुनावों में उन्होंने भी वोट डाला था। वहीं 102 साल की संपत बाई कहती हैं कि पहले वह वोट डालने के लिए 17-18 किमी दूर जाती थीं, और अभी भी उनकी हिम्मत बरकरार है।
कोई चिंता नहीं...
यहां के लोग चिंता कम करते हैं, शायद यही वजह है इनकी लंबी उम्र की। इस गांव में सात लोगों की उम्र 100 साल से अधिक है और 5 लोग ऐसे हैं जो दावा करते हैं कि उनकी उम्र 100 से ज्यादा है। इस बात को साबित करने के लिए उनके पास कोई दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन उन्हें इस बात की कोई चिंता भी नहीं है।
मोबाइल फोन...
हरे भरे जंगल और पहाड़ियों से घिरे इस गांव में संचार सुविधाओं बहुत कम है। यहां के कुछ गांव वालों का कहना है किस इस उम्र में भी वे हर बार वोट डालने जाते हैं। यहां गांव में सब एक दूसरे को जानते हैं। संचार सुविधाओं की कमी के चलते यहां बहुत ही कम लोग के पास मोबाइल फोन हैं। यहां के लोगों का कहना है कि हम सब एक दूसरे को जानते हैं तो फोन की जरूरत ही नहीं पड़ती।
ये खाते हैं खाने में...
500 लोगों के इस गांव में 100 साल से ऊपर के लोगों के बारे में जानने के बाद एक जो सवाल सबसे पहले सामने आया कि आखिर ये खाते क्या हैं। इसके जवाब में यहां के 100 साल से ऊपर वाले लोगों का कहना है कि वे सादी दाल रोटी या फिर दूध रोटी ही खाते हैं।
वहीं 107 साल के हमीरसिंह अपनी उम्र के राज के बारे में कहते हैं कि इसका कारण चाय पीना और दोस्तों के साथ ढेर सारी बातें करना है। उनके अनुसार वे शाम को घर लौटने के बाद वह अपनी 102 साल की पत्नी से भी बातें करतें हैं। दोनों एक दूसरे को बताते हैं कि उनका दिन कैसा रहा। वहीं उनकी पत्नी पारी का कहना है कि जब भी वह बोर हो जाती हैं तो अपनी सहेलियों के पास चले जाती हैं।
शादी के साल तक याद नहीं...
शादी के सवाल पर उनकी पत्नी कहती हैं कि उन्हें याद नहीं कितने साल हो गए। जबकि हामिर का कहना है कि हम शादी को कितने साल हो गए इसकी चिंता नहीं करते।
लंबी उम्र के संबंध में वे यह भी बताते हैं कि अगर उनमें से कोई किसी दूसरे को कुछ गलत बोल देता है, तो दूसरा वहां से चला जाता है। वह आपस में लड़ाई नहीं करते और कुछ समय बाद सबकुछ भूल जाते हैं।
गांव के ही रामासिहं (75 वर्षीय) का कहना है कि उनके पिता 130 साल से ज्यादा जी चुके हैं। अभी कुछ साल पहले ही उनकी मौत हुई है। कहा जाता है कि मध्यप्रदेश के इस गांव में सबसे अधिक संख्या में 100 साल की उम्र से ज्यादा के बुजुर्ग रहते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 4,117 मतदाता 100 की उम्र पार कर चुके हैं। वहीं तराना में 100 की उम्र पार कर चुके 117 लोग हैं। जबकि आष्टा में 112 और इच्छावर में 101 वोटर हैं।