इंटरनेट पर लक्षण देखकर खुद इलाज करने की प्रवृत्ति बना रही बीमार
भोपाल. इंटरनेट के जाल में फंसे लोगों में लगातार सेल्फ डायग्नोसिस की लत बढ़ती जा रही है। इसके कारण वे ऐसी मानसिक स्थिति में होते हैं कि उन्हें डॉक्टर से लेकर जांच रिपोर्ट पर भरोसा नहीं होता है। इसका असर यह हो रहा है कि कोई व्यक्ति अलग-अलग लैब से 30 जांचें करा रहा है। वहीं दूसरी तरफ कोई व्यक्ति जरूरी जांच तक कराने को राजी नहीं है। इंटरनेट के जरिए सेल्फ डायगनोसिस की लत को डॉक्टरों ने idiot syndrome इडियट सिंड्रोम का नाम दिया है।
क्या है इडियट सिंड्रोम
- मामूली लक्षण को Internet नेट पर सर्च कर गंभीर बीमारी मान लेना।
- चिकित्सीय जानकारी के लिए बाध्यकारी, अवांछित ऑनलाइन खोज में घंटों खर्च करना।
- एक या अधिक गंभीर बीमारियां होने के बारे में हमेशा ङ्क्षचतित रहना।
-ऑनलाइन मिली जानकारी से व्यथित महसूस करना।
- स्थिति के बारे में सबसे खराब निष्कर्ष पर पहुंचने की आदत।
- लक्षणों के बारे में इंटरनेट द्वारा बताई गई हर बात पर विश्वास करना।
सावधानी बरतना जरूरी
बीमारी के बारे में सबकुछ जानना मरीज का हक है। लेकिन नेट पर हर जानकारी सही नहीं होती। इससे डॉक्टर और मरीज के रिश्ते में भी दरार आ रही हैं। इसलिए इंटरनेट का प्रयोग बहुत ही सावधानी और सोच-समझकर करें।
- डॉ. रंधीर सिंह, प्रेसिडेंट, एमपीएनएचए, भोपाल ब्रांच
जांच हो या दवाएं जरूरी होती तभी यह लिखी जाती है। डॉक्टर को को इसके बारे में पूरी जानकारी होती है। ऐसे में इलाज के लिए बेहतर डॉक्टर की खोज करना अच्छा है। जिस डॉक्टर से इलाज कराएं, उस पर भरोसा रखना भी जरूरी है। तभी मर्ज का सही इलाज होगा और मरीज जल्द ठीक हो सकेंगे।
- डॉ. पंकज शुक्ला, पूर्व डायरेक्टर, एनएचएम