
भोपाल. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर ही नजर डालें तो राजधानी भोपाल की हवा इस समय प्रदेश में तीसरे सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। प्रदेश में भोपाल में एक जून को एक्यूआई 136.7 दर्ज किया गया। यदि भोपाल के अंदर अलग-अलग स्टेशनों की बात करें तो बैरागढ़ में 145, गोविंदपुरा में 132 एवं कोलार रोड में एक्यूआई 159 दर्ज किया गया है। इस तरह कोलार रोड प्रदेश के दूसरे सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण वाले शहर से अधिक प्रदूषित है। लेकिन यह तो सरकारी आंकड़ें हैं।
भोपाल स्थित अंतररराष्ट्रीय संस्था जीसीड (ग्लोबल अर्थ सोसाइटी फॉर एनवायरमेंटल एनर्जी एंड डेवलमेंट) की ओर से स्थापित जनता की लैब की ओर से जुटाई जानकारी कहीं अधिक चौंकाने वाली जीसीड प्रमुख पर्यावरणविद् डॉ.सुभाष सी पांडेय बताते हैं कि, भोपाल शहर में ही हमीदिया रोड, एमपी नगर, नेहरू नगर से लेकर लालघाटी जैसे इलाकों में पीक अवर्स में खतरनाक वायु प्रदूषकों से लेकर पार्टिकुलेट मेटर, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, नॉक्स, सॉक्स, कार्बनमोनोऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा ,दिल्ली स्थित अनेक संवेदनशील क्षेत्रों के बराबर रहती है। लेकिन यहां इसका कोई संज्ञान लेने वाला नहीं है।
शहर के रहवासी क्षेत्रों के अलावा सबसे खराब स्थित शहर के पास बनाई जा रहे ट्रचिंग ग्राउण्ड आदमपुर साइट की है। यहां अप्रेल के तीसरे सप्ताह में आग लगने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सामान्य स्तर पीएम 2.5 - 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पीएम 10 - 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर एसओटू- 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर नॉक्स- 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर गांव- पीएम2.5- पीएम10- एसओ टू, - नॉक्स- (चौबीस घंटे का औसत प्रदूषण ) आदमपुर एमएसडब्ल्यू साइट- 149.0- 317.9- 2.0- 12.3 पड़रिया- 83.6- 198.7- 2.0- 23.8 कोलुआ खुर्द- 41.7- 151.2- 2.0- 11.8 आदमपुर गांव- 45.7-80.8- 2.0- 7.6 बॉक्स- मंडीदीप -एक्यूआई- 189 भोपाल- 136.7 औसत छुपा रहा असल स्तर खास बात
यह है कि यह प्रदूषण भी तब पाया गया था जबकि नॉक्स (नेशनल एम्बियंट एयर क्वालिटी स्टैण्डर्ड 2009) ने वायु की गुणवत्ता मापने के तय 12 मानकों पीएम 10, पीएम 2.5, सल्फर डॉई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डॉई ऑक्साइड,ओजोन, लैड कॉर्बन मोनो ऑक्साइड, अमोनिया, बेनजीन, बंजो पायरीन , आर्सैनिक, निकिल में से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केवल पीएम 10, पीएम 2.5, नाइट्रोजन डॉई ऑक्साइड और सल्फर डाइ ऑक्साइड का टेस्ट किया था। इसी तरह शहर में भी प्रदूषण का यह स्तर एक्यूआई यानि औसत पर आधारित है, जबकि असल में मनुष्य सबसे अधिक प्रदूषण के समय में उसी क्षमता से सांस लेता है जितना प्रदूषण के कम रहने की अवस्था में है।