
भोपाल. प्रदेश में यूरिया और डीएपी को लेकर मारामारी मची है। भोपाल के 70 हजार किसानों को नवंबर लास्ट में गेहूं और चने की फसल बोने के बाद इसकी जरूरत पड़ेगी। ठीक एक माह बाद जिले में कृषि विभाग के अफसरों की असली परीक्षा शुरू होगी। अभी अफसर ये कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि सब ठीक है। हकीकत ये है कि अभी भोपाल और आस-पास के किसान को इतनी जरूरत ही नहीं है। इसके बाद भी नवंबर लास्ट तक चार हजार मीट्रिक टन यूरिया और डीएपी की जरूरत कृषि विभाग को है। अगर ये जरूरत पूरी नहीं हुई तो जिले में भी हाहाकार मच सकता है।
भोपाल में 35 सोसायटियों के माध्यम से यूरिया और डीएपी की सप्लाई की जाती है। काफी खाद प्राइवेट दुकानों से भी सप्लाई किया जाता है। इसके बाद भी जिले में यूरिया की कमी रहती है। ये स्थिति तब है जब सीहोर, विदिशा और रायसेन में यूरिया और डीएपी का एक-एक रैक है । मतलब तीनों तरफ से भोपाल को खाद की सप्लाई होती है। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को ही डीएपी और यूरिया की 450 मीट्रिक टन रैक सीहोर में आई है। इसमें से 200 मीट्रिक टन फंदा और 250 मीट्रिक टन गोविंदपुरा के गोदामों में रखवा दिया है।
40 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत
भोपाल की 35 सोसायटियों की बात करें तो यहां पर एक सीजन में 40 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत पड़ती है। वर्तमान में 10 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड है। इसमें से 2 मीट्रिक टन अभी भी कम है। आगामी एक माह में इसकी चार गुना खपत होने वाली है। ऐसे में अधिकारियों की असली परीक्षा तब होगी।
वर्जन
भोपाल में अभी यूरिया और डीएपी की रैक आए हैं। इस कारण अभी ज्यादा जरूरत नहीं है। हमारी डिमांड नवंबर आखिरी तक तक चार मीट्रिक टन की ओर है। जो संभवता मिल जाएगी। रेट पहले ही तय हो चुके हैं। डिमांड ज्यादा नहीं है, इसलिए रेट भी ठीक हैं।
सुमन प्रसाद, उपसंचालक, कृषि विभाग