Bhopal Municipal Corporation Budget 2026 : भोपाल नगर निगम परिषद की अहम बैठक में 'शहर सरकार' ने अपना सालाना बजट पेश कर दिया है। ये सालाना बजट 3938 करोड़ 45 लाख 28 हजार पेश किया गया है।
Bhopal Municipal Corporation Budget 2026 :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम परिषद की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक इसलिए भी अहम थी, क्योंकि इसमें 'शहर सरकार' ने अपना सालाना वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। महापौर मालती राय ने लगातार चौथी बार भोपाल नगर निगम का बजट पेश किया। नगर निगम परिषद की बैठक में दो प्रस्ताव पारित हुए। कंडम वाहनों को लेकर स्क्रैप पॉलिसी और पार्किंग का प्रस्ताव पास हुआ। वहीं, सदन में गौकशी का मामला गरमाया रहा।
भोपाल नगर निगम में सोमवार 23 मार्च को महापौर मालती राय ने 3938 करोड़ 45 लाख 28 हजार का बजट पेश किया। महापौर मालती ने लगातार चौथी बार बजट पेश किया। जिसमें आय और व्यय दोनों 3938 करोड़ 45 लाख 28 हजार प्रस्तावित है। बजट में 5 फीसदी सुरक्षा निधि के रूप में 108 करोड़ 89 लाख 29 हजार रखे गए हैं। सुरक्षा निधि के चलते संभावित घाटा 108 करोड़ 89 लाख 29 हजार, एमपी नगर निगम अधिनियम 1956 की धारा 97(क) के तहत बजट पेश किया गया है।
2025-26 का संशोधित और 2026-27 का प्रस्तावित बजट सदन में रखा गया। बैठक शुरू होते ही विपक्ष ने स्लाटर हाउस में गौकशी का मामला उठाया। विपक्ष की नेता शबिस्ता जकी ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली बैठक में आयुक्त को कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। असलम चमड़ा समेत तमाम आरोपियों पर निगम से क्यों कोई कार्रवाई नहीं की गई ? विपक्ष की नेता ने शासन स्तरीय कमेटी की जांच रिपोर्ट पेश करने की मांग की।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि, शहर सरकार ने मामले में FIR नहीं कराई। गौवध और गोमांस निर्यातक आरोपी असलम चमड़ा को नियम विरुद्ध टेंडर जारी किया गया। शहर सरकार, अधिकारियों को बचाने में जुटी है। मामले में कई अधिकारी और अगर जांच हुई तो कई जनप्रतिनिधि भी आरोपी बनेंगे। नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कई सवाल खड़े किए। वहीं, नगर निगम के मामले पर बनाए गए प्रतिवेदन पढ़ने को लेकर भी नोकझोक हुई। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा- प्रतिवेदन पढ़ने में पूरा दिन निकल जाएगा। निगम नेता प्रतिपक्ष जकी ने कहा- 'आरोपियों को बचाना चाहते हैं, इसलिए सच्चाई जनता के सामने परिषद में सार्वजनिक नहीं करना चाहते।'
सदन में आदमपुर छावनी में कचरा निष्पादन का मामला भी उठा। टेंडर दिया जाए या नहीं, ये बैठक का प्रमुख एजेंडा, जिस पर सदन में चर्चा हुई। लेकिन परिषद के प्रमुख एजेंडे में सत्तापक्ष के पार्षदों ने रुचि नहीं दिखाई। चर्चा में NHAI के द्वारा कचरे को सड़क का बेस बनाने की खबर के बाद टेंडर नहीं देने पर जोर। टेंडर जारी हो या नहीं, इसका फैसला आयुक्त पर छोड़ा गया।
निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा- आदमपुर खंती में शहर का कचरा है। सड़क निर्माण में ऐसे कचरा प्रयोग किया जाएगा जिसका पूर्ण रूप से नष्ट नहीं किया जा सकता। जितना भी कचरा है इसका निष्पादन होगा, उसके बाद ही टेंडर कंप्लीट माना जाएगा। टेंडर में 330 दिन का समय दिया गया है। जैसे-जैसे जमीन खाली होगी वैसे-वैसे भुगतान किया जाएगा। 55 करोड़ की राशि से कचरा में उत्पादन का काम किया जाना है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने जल्द से जल्द कचरा निष्पादन के लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आदमपुर खंती हमारे शहर ने ही बनाई है तो साफ करने की भी जिम्मेदारी हम सभी की है।
नगर निगम के अधिकारी बीजेपी-कांग्रेस पार्षद और एमआईसी सदस्यों का फोन नहीं उठाते। इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस पार्षद एक स्वर नजर आए। वहीं, आसंदी से निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने निगम कमिश्नर को निर्देश दिए कि, जो अधिकारी पार्षद के फोन का जवाब न दे उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।