भोपाल

सुरक्षा में सेंध…अफसर हो या आम नागरिक भोपाल में सब चोरों के निशाने पर

Bhopal Theft Cases : भोपाल की 17 से ज्यादा कॉलोनियों में 6 महीने के दौरान चोरी की वारदातों से दहशत है। ऊंची दीवारें, बंद गेट और CCTV भी चोरों को रोकने में नाकाम दिख रहे हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारी और ACP के घर भी बदमाशों के निशाने पर रहे।
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Updated: 7 Nov 2026, 10:24 AM IST
Bhopal Theft Cases
चोरी की वारदातों से कई इलाकों में दहशत (फोटो सोर्स: Patrika File)

Bhopal News :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की कॉलोनियों में लोग सुरक्षा के लिए ऊंची दीवारें बनवा रहे हैं, गेट पर ताले लगा रहे हैं और सीसीटीवी कैमरे भी लगवा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां चोरों के हौसले बुलंद हैं।बीते 6 महीनों के दौरान शहर की 17 से ज्यादा कॉलोनियों और आवासीय परिसरों में चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन वारदातों में बदमाशों ने सोने-चांदी के जेवर, लाखों की नकदी, वाहन और घरेलू सामान तक चोर ले गए।

चोरी की प्रमुख वारदातें

केस-1: कोलार थाना क्षेत्र के दानिश कुंज में गृह मंत्रालय के अधिकारी अरुण कुमार राय जून माह में जब परिवार सहित उज्जैन में महाकाल दर्शन करने गए थे। इसी बीच चोर ताला तोड़कर घर में घुसे और पांच लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवर और नकदी समेट ले गए। परिवार के लौटने पर वारदात का पता चला।

केस-2: कोलार रोड के दानिशकुंज-2 स्थित मकान नंबर 507 में 10 और 11 सितंबर को ट्रैफिक एसीपी विजय कुमार दुबे के घर में बदमाश ताला तोड़कर दाखिल हुए। उस समय एसीपी ड्यूटी पर थे और उनकी पत्नी उज्जैन गई हुई थीं। चोर छह लाख रुपए नकद, पुश्तैनी सोने- चांदी के जेवर, सिऋके, बर्तन और मूर्ति ले गए। चोरी 10 लाख रुपए तक हुई। पुलिस ने बाद में चार आरोपियों को गिरख्नतार कर सामान बरामद किया।

केस-3: अगस्त में निशातपुरा क्षेत्र की प्रीमियम ऑर्चर्ड कॉम्प्लेक्स शिव नगर, शंकराचार्य धाम और रतन कॉलोनी में चोरी की कई घटनाएं हुईं। सोनू जैन, शोनिया जैन, शीला जैन, प्रोफेसर विनोद कुमार मीना, राकेश विश्वकर्मा और संदीप कुमार नाथ के मकानों को निशाना बनाया गया। बदमाश कहीं ताले तोड़कर तो कहीं रसोई की ग्रिल काटकर दाखिल हुए। राकेश विश्वकर्मा के घर से 10 हजार और संदीप कुमार नाथ के यहां से 15 हजार रुपए नकद चोरी हुए।

यह करना जरूरी है

अमराई कॉलोनी निवासी सुनील कुमार ङ्क्षसह ने कहा कि पुलिस को चोरी के हॉटस्पॉट चिह्नित कर गश्त का रूट तय करना होगा। संदिग्ध वाहनों की जांच, किराएदारों का सत्यापन और खराब स्ट्रीट लाइट दुरुस्त कराने की व्यवस्था भी जरूरी है। कॉलोनियों के गेट बंद हैं, लेकिन यदि गलियों में निगरानी कमजोर रही तो अपराधियों के लिए रास्ते खुले रहेंगे।

इन बिंदुओं पर जांच जरूरी

-रात 10 से 2 बजे के बीच पुलिस वाहन कितनी बार कॉलोनियों में पहुंचते हैं।
-किन रास्तों पर अंधेरा रहता है।
-कितने सीसीटीवी कैमरे बंद हैं और बीट पुलिसकर्मी कितनी नियमितता से क्षेत्र में पहुंचते हैं।
-रहवासी अपने स्तर पर गार्ड और कैमरों की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन केवल निजी सुरक्षा से अपराध रोकना संभव नहीं।

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7 Nov 2026, 10:24 AM IST
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